अयोग्य लोगों को सुरक्षा देने पर हाईकोर्ट ने उठाये सवाल, दिखावा करने वालों को सुरक्षा नहीं दी जाये, 12 वर्षो में 2.88 करोड़ रूपये खर्च
ग्वालियर. हाईकोट्र की एकलपीठ ने अयोग्य व्यक्तियों को दी जा रही सुरक्षा या फिर सवाल खड़े किये है। हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई बेईमानी या प्रचार के उद्देश्य से सुरक्षा ले रहा है तो तो उसे सुरक्षा नहीं दी जानी चाहिये। आईजी ग्वालियर और एसएसपी को इस निर्देश का पालन करने की अपेक्षा की गयी। है।
2.88 करोड़ रूपये हुए सुरक्षा पर खर्च
हाईकोर्ट ने महलगांव निवासी संजय शर्मा और दिलीप शर्मा को दी गयी सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश पर सुनवाई की है। पिछले 12 वर्षो मकें उनकी सुरक्षा पर 2.88 करोड़ रूपये खर्च किये गये। जिसके बाद प्रशासन ने उनकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी किये थे। कुर्की से बचने के लिये दोनों ने किस्तों में राशि जमा की और हाईकोर्ट में यह भी बताया गया है कि वह बैंक से लोन लेकर शेष रकम चुकायेंगे। हाईकोर्ट ने उन्हें 4 सप्ताह में बाकी रकम भुगतान करने का वक्त दिया है।
2 बार हटाई गयी सुरक्षा फिर बहाल
प्हली बार 12 मई 2008 को उनकी सुरक्षा हटा दी गयी, लेकिन उन्होंने जान का खतरा बताकर आपत्ति जताई है। जिसके बाद सुरक्षा फिर बहाल कर दी गयी। 2011 में दोबारा सुरक्षा हटाइ गयी। जिसके खिलाफ 2012 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी तो हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए अगली सुरवाई तक सुरक्षा जारी रखने का आदेश दिया तो जिसका फायदा उठाकर उन्होंने 12 वर्षो तक सुरक्षा बनाये रखी।
सुरक्षा की मांग और कोर्ट केस
संजय और दिलीप शर्मा, जो हीरालाल एस्टेट एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं, ने 12 साल पहले जान-माल की सुरक्षा के लिए आवेदन किया था। उस समय, उनके बेटों पर बदमाशों ने हमला किया था, जिसमें गोलीबारी के दौरान रोहित नामक युवक की मौत हो गई थी। इस हत्याकांड में दिलीप शर्मा मुख्य गवाह थे, जिसके चलते उन्हें पुलिस सुरक्षा दी गई थी।
