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8th Pay Commission के गठन को लेकर इस संगठन ने केन्द्र सरकार को लिखा पत्र

नई दिल्ली. 8वें वेतन आयोग -लोकसभा चुनाव खत्म होने और नई सरकार के सत्ता संभाल लेने के बाद ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेंडरेशन (AIRF) ने केन्द्र सरकार को एक पत्र लिखकर आठवें वेतन आयोग को गठित करने का आग्रह किया है। नया वेतन आयोग केन्द्र सरकार के कर्मचारियोंकेलिये वेतन और पेंशन में संभावित संशोधन को लेकर रिपोर्ट बनायेगा और अपनी सिफारिशें करेगा।
भारतीय रेलवे कर्मचारियों की सबसे बड़ी ट्रेड यूनियन ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महासचिव शिवगोपाल मिश्रा ने भारत सरकार के कैबिनेट सचिव का एक पत्र लिखा है। इसमें केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों के वेतन/भत्ते/पेंशन और अन्य लाभों को संशोधित करने के लिये 8वें केन्द्रीय वेतन आयोग के तत्काल गठन की मांग की गयी है। इसके गठन का एक करोड़ से ज्यादा केन्द्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह सरकारी कर्मचारियों के वेतन और अन्य लाभों से संबंधित विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगा।
कब होगा 8वें वेतन आयोग का गठन
7वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद से 10 साल के अंतराल के साथ, अगला वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होना चाहिये। केन्द्र आमतौर पर 2 अलग-अलग वेतन आयोगों के कार्यान्वयन के बीच 10 साल का अंतराल रखता है। लेकिन, केन्द्र अगले वेतन आयोग के गठन के मामले में अभी तक चुप रहा है। अब जबकि लोकसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं और मोदी 3.0 सत्ता में हैं। 8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर चर्चा तेज हो गयी है।
अपने पत्र में एआईआरएफ ने सरकार से कहा है कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर 1 जनवरी 2016 में अमल किया गया था। हालांकि, जनवरी 2016 से न्यूनतम वेतन को संशोधित कर 26 हजार रूपये प्रतिमाह करने की मांग को खारिज कर दिया गया। 26 हजार रूपये के न्यूनतम वेतन की गणना आईएलसी मानदंडों और डॉ. एक्रोयड फॉर्मूला आदि के विभिन्न घटकों के आधार पर की गयी थी।
क्या है AIRF की न्यूनतम वेतन की मांग
संघ ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि उसने सीपीसी के समक्ष यह बात भी रखी है। राष्ट्रीय परिषद () के कर्मचारी पक्ष के प्रस्तावित न्यूनतम वेतन अब भी कम है। दुर्भाग्य से हमारे सभी तर्को को 7वें सीपीसी ने बिना किसी आधार के खारिज कर दिया और न्यूनतम वेतन के रूप् में 18 हजार रूपये की सिफारिश की है।

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वर्ष 2024 तक आयेगी पहली मेड इन इंडिया चिप, माइक्रोन प्लांट का शुरू, टाटा का अहम रोल

नई दिल्ली. मेड इन इंडिया आईफोन से लेकर मेड इन इंडिया लैपटॉप तक आने वाले समय में भारत सभी इलेक्ट्रॉनिक प्रॉडक्ट्स पर अपनी छाप छोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सेमी-कडंक्टर के क्षत्र में ग्लोबल प्लेयर बनने की तरफ एक बड़ा कदम गुजरात में उठाया गया है। जहां पर माइक्रोनस-टेक्नोलॉजी के भूमिपूजन के साथ प्लांट का काम शुरू हो गया है और प्लांट का कंस्ट्रक्शन टाटा प्रोजेक्ट्स द्वारा किया जा रहा है।
पहली कंपनी देश में चिप का प्रॉडक्शन करने वाली
भारत को सेमी कंडक्टर हब नाने के उद्देश्य के तहत देश में माइक्रोन टेक्नोलॉजी देश में चिप बनाने वाली पहली कंपनी होगी। शनिवार को सूचना प्रौद्योतगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर और गुजरात के सीएम भूपेन्द्र पटेलकी उपस्थिति गुजरात के साणंद में सेमी कंडक्टर टेस्टिंग एंड एसेंबलिंग प्लांट का भूमि पूजन किया। कंपनी की तरफ से इस बात की जानकारी भी शेयर की गयी कि इस प्लांट के माध्यम से लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिये हायरिंग भी स्टार्ट कर दी गयी है।
जून में हुआ था समझौता
गौरतलब है कि पीएम नरेन्द्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के 3 माह के बाद इस प्लांट का काम शुरू हो गया है। इस साल जून 2023 में पीएम मोदी ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान माइक्रोन के शीर्ष अधिकारियों के साथ मुलाकात की थी और देश में सेमी कंडक्टर प्लांट स्थापित करने के लिये माइक्रोन टेक्नोलॉजी के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये गये थे। अब महज 3 माह बाद ही माइक्रोन अपना प्लांट शुरू करने के लिये पूरी तरह तैयार है। आपको बता दें कि कंपनी का प्रस्तावित निवेश 2.75 अरब डॉलर है। यह सेमी कंडक्टर मिशन के तहत सबसे बड़ा निवेश हैं।

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लो आ गया सैटेलाइट कॉलिंग स्मार्टफोन, बिना नेटवर्क के ही बात कर सकेंगे, फीचर्स हैं अलग अंदाज में

नई दिल्ली. Satellite Calling Smartphone सैटेलाइट फोंस के बारे में आप सभी ने जरूर सुना होगा। लेकिन शायद आप में से कोई ऐसा शख्स होगा जिसने कभी भी सैटेलाइट फोन उपयोग किया होगा। दरअसल सैटेलाइट फोंस का उपयोग आप बिना नेटवर्क के भी कर सकते हैं और इनसे कॉलिंग की जा सकती है। अधिकतर मामलों में सैटेलाइट फोन को ऐसी जगहों में उपयोग किया जाता है। जहां नेटवर्क नहीं आता है। जैसे पहाडि़यों पर, समुद्री इलाकों और ज्यादा बर्फीले दूरदराज के इलाकों पर, इतना ही नहीं इनका उपयोग करने की परमिशन फोर्सेज को ही दी जाती है जिससे इनका गलत उपयोग न किया जा सके। हालांकि अब आम आदमी के लिये भी ऐसा फोन बाजार में उतार दिया गया है। जो नॉर्मल फोन की तरह दिखता है। लेकिन असल में यह सैटेलाइट फोन हैं।


जिस फोन के बारे मे ंहम आपको बताने जा रहे हैं वह है। Huawei Mate 60 Pro  यह असल में एक सैलेलाइट स्मार्टफोन है जिसे बेहद ही दमदार तरीके से बिना नेटवर्क के भी उपयोग किया जा सकेगा।


अगर आप इसकी कीमत जानना चाहते हैं तो आपको बता दें कि यह भारतीय करेंसी के हिसाब से तकरीबन 80 हजार रूपये का है। यह फोन कीमत के मामले में आईफोन को टक्कर देता है। लेकिन इसकी कीमत आईफोन 14 मॉडल से अधिक करीब है।


आपको बता दें कि में आपको सैटेलाइट कॉलिंग की खासियत मिल जाती है जिसका उपयोग करके आप बड़ी ही आसानी से बिना नेटवर्क के भी बातचीत कर सकते हैं।


स्मार्ट फोन 5जी प्रोसेसर औरे सिस्टम-ऑन-चिप के साथ आता है जिसे किरिन 9000 कहा जाता है। इसे चीन में ही तैयार किया गया है।


यह फोन ऐसे लोगों के बड़े काम आ सकता है जो लगातार ट्रिप पर रहते हैं और दूर-दराज के इलाकों में भ्रमण करते हैं। इससे नेटवर्क की समस्या नहीं रहती है। इस वजह से आपको कॉलिंग में परेशानी नहीं आती है।

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व्यापार मेला की सबसे पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाईकिल लांच-आर मुरलीधरन

ग्वालियर. ग्वालियर व्यापार मेला में गुरूवार की दोपहर 4 बजे ऑटोमोबाइल सेक्टर में खाटूश्याम ऑटोमोबाइल शोरूम पर होप ने बाजार में पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाईकिल को बाजार में उतारा है इस इलेक्ट्रिक मोटरसाईकिल को होम कंपनी सेल्स हैड आर मुरलीधरन, खाटूश्याम ऑटोमोबाइल शोरूम के संचालक रोहित और भरत राजपूत सहित अपनी टीम के साथ मिलकर इलेक्ट्रिक मोटरसाईकिल को बाजार में लांच किया है। मध्य प्रदेश के उभरते स्मार्ट-सिटी, ग्वालियर ने आज भारत के सबसे तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता HOP इलेक्ट्रिक द्वारा शहरी कम्यूट हाई-स्पीड ई-मोटरसाइकिल, HOP OXO के लॉन्च का जश्न मनाया।

HOP OXO एक आकर्षक डिजाइन में स्थिरता और सामर्थ्य को जोड़ती है। अपनी अत्याधुनिक विशेषताओं के साथ, HOP OXO लोगों के राइड करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। OXO की टॉप स्पीड 90 किमी/95 किमी/घंटा* और वास्तविक रेंज 135 किमी/150 किमी है। ई-मोटरसाइकिल 72 V के उद्योग-प्रथम वोल्टेज आर्किटेक्चर, 5.2Kw / 6.2kw* की मोटर पावर (पीक) और 185 Nm / 200 Nm* के अधिकतम टॉर्क (व्हील पर) पर आधारित है। मोटरसाइकिल एक BLDC हब मोटर, साइनसॉइडल FOC वेक्टर कंट्रोल और इको-पावर-स्पोर्ट राइडिंग मोड्स और रिवर्स मोड से लैस है।

आर मुरलीधरन, नॉर्थ सेल्स हेड, HOP इलेक्ट्रिक ने कहा, “बढ़ती जलवायु संरक्षण जागरूकता, और सस्टेनेबल मोबिलिटी प्लेटफार्मों को अपनाने से कार्बन फुट-प्रिंट को कम करने की दिशा में सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में काफी मदद मिलेगी। … ईवी का हमारा पोर्टफोलियो और नया HOP OXO, सरकार के एजेंडे के अनुरूप हमारी प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। ग्वालियर, जो भारत में उभरते स्मार्ट-शहरों में से एक है, में संभावित ग्राहकों के लिए हमारे उत्पादों को लाना खुशी की बात है । “

HOP OXO 5 अलग-अलग रंगों में उपलब्ध है – ट्वाइलाइट ग्रे, कैंडी रेड, मैग्नेटिक ब्लू, इलेक्ट्रिक येलो और ट्रू ब्लैक। प्रो पैकेज की विशेषताएं नियम और शर्तों के अधीन हैं।

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एके-203 का भारत में निर्माण शुरू, दुश्मन के होंगे दांत खट्टे

AK-203 Assault Rifleनई दिल्ली. उत्तरप्रदेश के अमेठी जिले में स्थित कोर्वा आर्डिनेंस फैक्ट्री में भारत और रूस के संयुक्त प्रयास से बनी असॉल्ट राइफल कलाशनिकोव AK-203 का उत्पाउदन शुरू हो चुका है। पहला बैच बनकर तैयार है। जल्दी इंडियन आर्मी को इसकी डिलेवरी की जायेगी। भारतीय सेना के लिये कुल मिलाकर 6.01 लाख असॉल्ट राइफलों का उत्पादन शुरू कर दिया गया है।             इससे पहले रूसी से 70 हजार से 1 लाख राइफल्स, उनके पार्ट्स और तकनीकी भारत भेजा गयी थी। AK-203 कलाशनिकोव सीरीज की सबसे एडवांस असॉल्ट राइफल हैं। जो कम्पनी इसे बना रही है उसका है। इंडो-रसिया राइफल्स प्रा. लिमि (IRRPL)। इस राइफल्स के आने से भारत में इंसास(INSAS) का उपयोग बन्द कर दिया जायेगा या फिर बेहद कम हो जायेगा। एके-203 इंसास से कई मामलों में बेहतर, आसान और घातक हैं।

AK-203 Assault Rifle

INSAS में 20 से 30 राउंड की मैगजीन लगती है. AK-203 में 30 राउंड की बॉक्स मैगजीन लगती है. इंसास की मजल वेलोसिटी 915 मीटर प्रति सेकेंड है. AK-203 की मजल वेलोसिटी 715 मीटर प्रति सेकेंड है. यानी इंसास की गोलियां ज्यादा तेज गति से जाती है. दोनों ही राइफलें गैस ऑपरेटेड, रोटेटिंग बोल्ट तकनीक पर काम करती हैं.

इंसास राइफल पर इन-बिल्ट आयरन साइट, माउंट प्वाइंट लगाया जा सकता है, ताकि दूरबीन से दुश्मन को देखा जा सके. इस मामले में AK-203 ज्यादा बेहतर है क्योंकि इसपर एडजस्टबल आयरन साइट तो है ही, इसके अलावा पिकैटिनी रेल लगी है, यानी आप दुनिया के किसी भी तरह के दूरबीन को इस बंदूक पर लगा सकते हैं. यानी जितनी ताकतवर दूरबीन उतना घातक हमला.

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अगले माह खत्म हो रहा वीडी शर्मा कार्यकाल, डॉ. सुमेर सोलंकी का सबसे आगे, प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में राजेन्द्र शुक्ला, लालसिंह आर्य का नाम भी विचार

भोपाल. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 17 महीने के लिये बढ़ा दिया गया है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में 9 राज्यों में विधानसभा और आगामी वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। जेपी नड्डा का कार्यकाल 20 जनवरी को समाप्त होने वाला था लेकिन बढ़ाकर जून 2024 तक के लिये कर दिया गया है। मध्यप्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा का कार्यला बढ़ेगा या नहीं? इस पर जल्दी ही फैसला लिया जायेगा। वीडी का 3 वर्षीय कार्यकाल अगले माह में पूरा होने वाला है।
भाजपा सूत्रों के अनुसार तो नड्डा का कार्यकाल बढ़ाये जाने के बाद भी उनकी टीम में बड़े पैमाने पर बदलाव होना तय है। इसमें राष्ट्रीय पदाधिकारियों से लेकर राज्य के अध्यक्ष भी बदले जाना है। खासकर उन राज्यों में जहां भाजपा की सरकार है। दरअसल, पार्टी विधानसभा चुनावों को 2024 के लोकसभा चुनाव के सेमीफायनल के तौर पर देख रही है।
वीडी शर्मा को केन्द्र जिम्मेदारी मिलने संभावना
भाजपा सूत्रों के अनुसार विष्णुदत्त शर्मा को हटाया तो उन्हें केन्द्र में जिम्मेदारी दी जा सकती है। उनके स्थान पर पार्टी चुनावी गणित के हिसाब से जातीय कार्ड खेल सकती है। इस नजर से एमपी में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती आदिवासी वोटबैंक को साधने की है। 2018 में हार की वजह इस बड़े वोटबैंक को छिटकना था। ऐसे में आदिवासी नेता को प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया जा सकता है। इसमें राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी का नाम आगे है। सोलंकी मोदी-शाह की पसंद भी है और मुख्यमंत्री के साथ उनकी पटरी भी बैठ जायेगी।

आदिवासी चेहरा है डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी
मध्यप्रदेश में आदिवासी वोटर्स 22 प्रतिशत हैं। आदिवासी बहुल इलाके में 84 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 84 में से 34 सीट पर जीत हासिल की थी। 2013 में इस इलाके में 59 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली थी। 2018 में पार्टी को 25 सीटों पर नुकसान हुआ है। जिन सीटों पर आदिवासी जीत और हार तय करते हैं। वहां सिर्फ भाजपा को 16 सीटों पर ही जीत मिली है। 20113 की तुलना में 18 सीट कम है। अब सरकार आदिवासी जनाधार को वापिस भाजपा के पाले में लाने की कोशिश में जुटी है।

लालसिंह आर्य को सौंपी जा सकती है कुर्सी
मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी यदि दलित मतदाता को साधे रखने की रणनीति पर आगे बढ़ती है तो इस वर्ग से प्रदेशाध्यक्ष बनाये जाने से मना नहीं किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह आर्य को भी कुर्सी सौंपी जा सकती है लालसिंह आर्य, शिवराज सरकार के पिछले कार्यकाल में मंत्री रह चुके हैं। हालांकि वह 2018 में चुनाव हार गये थे।

राजेन्द्र शुक्ला की शिवराज से पटरी बैठती है विंध्य भी साधेगा
इसी तरह वीडी शर्मा का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया तो उनके स्थान पर सामान्य वर्ग के नेता को भी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इसके लिये पूर्व मंत्री राजेन्द्र शुक्ला इस रेस में आगे हैं। इसकी वजह यह है कि राजेन्द्र शुक्ला के नाम पर शिवराज सहमत हो जायेंगे और अन्य नेताओं की ओर से उनका विरोध नहीं होगा। खास बात यह है कि शुक्ला को अध्यक्ष बनाया जाता है तो भारतीय जनता पार्टी विंध्य के साथ-साथ महाकौशल भी साध लेगी।

 

 

 

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सागर अग्रवाल हैं चेम्बर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी, व्यापारियों के बीच मिल रहा अपार जनसमर्थन

ग्वालियर एक प्रमुख व्यवसायी और समुदाय के नेता सागर अग्रवाल ने मध्य प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (एमपीसीसीआई) में उपाध्यक्ष पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की है। सागर अग्रवाल, जो एमपीसीसीआई के कई वर्षों से सक्रिय सदस्य हैं, के पास वाणिज्य और उद्योग के क्षेत्र में समृद्ध अनुभव है। उन्हें राज्य में व्यवसायों के सामने आने वाली चुनौतियों की गहरी समझ है और स्थानीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।
MPCCI के उपाध्यक्ष के रूप में, सागर अग्रवाल व्यवसायों को फलने-फूलने के लिए अधिक अनुकूल वातावरण बनाने की दिशा में काम करने का वादा करते हैं। वह बुनियादी ढांचे में सुधार, नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने और छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों को सहायता प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रहा है। निजी क्षेत्र में अपने काम के अलावा, सागर अग्रवाल समुदाय के एक सक्रिय सदस्य भी हैं। वह विभिन्न सामाजिक और परोपकारी पहलों में शामिल रहे हैं और उन्होंने युवाओं के बीच शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए काम किया है।
सागर अग्रवाल का अनुभव, समर्पण और समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें उपाध्यक्ष पद के लिए एक आदर्श उम्मीदवार बनाती है। चुने जाने पर, वह MPCCI के लिए एक नया दृष्टिकोण और नए विचार लाएंगे, और यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे कि व्यवसायों और समुदाय के हितों का अच्छी तरह से प्रतिनिधित्व हो। MPCCI में उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव आने वाले 18 जनवरी को होगा, और सागर अग्रवाल ने अपने प्रचार अभियान की जोरदार शुरुआत कर दी है। वह व्यापारिक समुदाय के सदस्यों के साथ मिलते हैं, और उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
सागर अग्रवाल MPCCI में उपाध्यक्ष पद के लिए एक मजबूत उम्मीदवार हैं, जिनके पास समृद्ध अनुभव और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विकास और विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता है। उनके पास व्यवसाय समुदाय का समर्थन है और नए विचारों और नए दृष्टिकोणों को चैंबर में लाने के लिए अच्छी तरह से तैनात हैं।

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Mercedes-Benz Vision EQXX 1000 किमी एक बार चार्जा करने चलेगी इलेक्ट्रिक कार

नई दिल्ली. लग्जरी कार मेकर कम्पनी मर्सिडीज बेंज ने कुछ माह पहले भारतीय बाजार में अपनी इलेक्ट्रिक कार मर्सिडीज लांच की थी। अभी तक यह देश के सबसे अधिक रेंज देने वाली इलेक्ट्रिक कार थी जो फुल चार्ज में 857 किमी चलती थी। अब कम्पनी ने भारतीय बाजार में एक और दमदार इलेक्ट्रिक कार मर्सिडीज बेंज पेश की है। यह एक बार चार्ज होने पर 1000 किमी चल सकती है। विजन ईक्यूएक्सएक्स ईवी कॉन्सेप्ट को इस वर्ष की शुरूआत में दुनिया भर में पेश किया गया था।

एक बार चार्ज में महीने भर चलेगी
कम्पनी ने इस कार की परफॉर्मेन्स से अधिक एफिशिएंसी पर ध्यान दिया है। इसमें सिंगल इलेक्ट्रिक मोटर है जो 244एचपी (180केडब्ल्यू) जेनरेट करती है। इसमें 180केडब्ल्यएच की बैटरी है। 900 बोल्ट तक की चॉर्जिंग स्पीड को सपोर्ट करती है। रेंज को बढ़ाने के लिये इसमें रूफ पर सोलर पैनल भी रखा है। जिसके जरिये बैटरी की रेंज एक दिन में 25 किमी तक बढ़ जाती है। हालांकि यह सौर पैनल रियर विण्डो को भी ढंक देते हैं। जिससे गाड़ी चलाने में परेशानी हो सकती है। कुल मिलाकर अगर आप हर 20 किमी ऑफिस जाते हैं और महीने में 25 दिन ऑफिस जाना है तो इसकी बैटरी पूरा एक माह चल सकती है।

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बाड़े पर नही लगेंगें फुटपाथी, लगे तो होगी कार्यवाही

ग्वालियर।। महाराज बाड़े पर लगने वाले फुटकर बिक्रेताओं एवं ठेले वालो के लिए माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रतिवंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। माननीय न्यायालय के आदेश पालन में निगमायुक्त किशोर कन्याल के निर्देश पर मदाखलत उपायुक्त सत्यपाल सिंह चौहान के नेतृत्व में महाराज बाड़े पर खड़े होने वाले ठेलों एवं फुटपथियो को हटाते हुए समान जप्ती की कार्यवाही की गई। और सभी को चेतावनी दी गई कि कल से प्रभावी कार्यवाही की जाएगी। असुविधा से बचने के लिए बाड़े क्षेत्र में ठेला या फुटपाथ दुकान न लगाए।

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Hydrogen Car- हाइड्रोजन से 400 किमी दौड़ेगी कार

नई दिल्ली. भारत में जल्द ही आपको हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली गाडि़यां सड़कों पर दौड़ती दिखाई देगी। भारत सरकार लगातार इलेक्ट्रिक और बायो-फ्यूल से चलने वाले वाहनों पर जोर दे रही है। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि भारत में आम लोगों को कब से हाइड्रोजन कार मिलने लगेगी। वह मंगलवार को निजी चैनल के समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस बीच उन्होंने प्रदूषण का 2 तरफा इलाज भी बताया। नितिन गडकरी ने कहा है कि पराली से ईंधन बनाया जा रहा है जो हाईड्रोजन कार में उपयोग हो सकेगा। नितिन गडकरी भारत की पहली हाइड्रोजन कार में यात्रा करके समारोह में शामिल होने के लिये पहुंचे थे।

क्या है हाइड्रोजन कार, यह इलेक्ट्रिक कार से कितनी महंगी और प्रति किमी कितना आएगा खर्च, जानें सब कुछ
दरअसल, हाइड्रोजन कार की मैन्यूफैक्चरिंग अब भारत में होगी। इसका प्रोसेस शुरू हो चुका है। अभी हाइड्रोजन 3 प्रकार से तैयार हो रहा है। ब्लैक हाइड्रोजन जो कोयले बनता है। ब्राउन हाइड्रोन जो पेट्रोलियम से तैयार किया जाता है। इसका तीसरा तरीका इस तरह से है ग्रीन हाइड्रोजन मुनिसिपल वेस्ट, सीवेज वॉटर या पानी से बनाया जाता है।
गड़करी ने बताया हम नगरपालिका के कचरे से ग्रीन फ्यूल बनाना चाहते हैं। हम अब ईधन आयात नहीं, बल्कि निर्यात करना चाहते हैं। हम खेती के वेस्ट से भी एनर्जी बना सकते हैं। इसके लिये हमें इलेक्ट्रोलाइजर चाहिये जो भारत दुनिया में सबसे अधिक बनाता है। वह 1.25 से 1.5 करोड़ का बनता है। इसका काम है ऑक्सीजन अलग कर हाइड्रोजन बनाना है। इसके लिये हमें जेनरेटर चाहिये जो अब इथेनॉल फ्यूल बेस्ड बना दिया गया है। किलोस्कर ने इसे कम लागत में बना दिया है।

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पानी से फ्यूल बनाकर कार 400 किमी दौड़ेगी
नितिन गडकरी ने कहा है कि एक समय तो उनकी पत्नी भी उनकी बात पर भरोसा हीं नहीं करती थी कि पानी से फ्यूल बनाकर कार चलेगी। इसलिये उन्होंने सोचा था कि वह अब इसी में यात्रा करें। सड़क परिवहन मंत्री गडकरी के अनुसार भारत में डेढ़ से 2 वर्ष में लोग हाइड्रोजन कार चला सकेंगे। उनकी कोशिश है कि 80 रूपये किलो हाइड्रोजन मिल सकेगी। 1 किलो हाइड्रोजन में कार 400 किमी दौड़ेंगी।

Explainer: हाइड्रोजन कार को क्यों कहा जा रहा फ्यूचर कार; जानिए कीमत, चलाने का खर्च और भारत की तैयारियां - Explainer Why Hydrogen FCEV Car Is Being Called Future Car Know Price


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