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दिग्गज जौहरी भगवान जगन्नाथ मंदिर के खजाने अनुमान तक नहीं लगा सके थे, 1978 में हुई दुर्लभ रत्नों की गणना

नई दिल्ली. ओडिशा में भगवानर जगन्नाथ मंदिर का खजाना 46 वर्षो के बाद खोला गया। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा विराजमान है। 12वी सदी में बने इस मंदिर के रत्न भंडार में कई दुर्लभ रत्न, सोने-चांदी के ज्वेलरी मौजूद है। इनमें भगवान के कीमती जेवरात बर्तन, राजाओं के मुकुट और भक्तों के द्वारा दान में दी गयी सोने-चांदी की बेशकीमती चीजें शामिल हैं।
वर्ष 1978 में जगन्नाथ मंदिर के खजाने को जब खोला गया था तो रत्नों की कीमत का आकलन करने में लिये जौहरी बुलाये गये थे। लेकिन वह भी खजाने की कुल कीमत का अंदाजा नहीं लगा सके थे। उस समय खजाने की गणना के लिये मुंबई और गुजरात से जौहरी आये थे जो खजाने में मौजूद दुर्लभ रत्नों को देख कर हैरान रह गये थे।

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कांग्रेस विधायक सुरेन्द्र पंवार गिरफ्तार

नई दिल्ली. अवैध खनन के मामले में ईडी की टीम ने बड़ा एक्शन लेते हुए हरियाणा के सोनीपत के कांग्रेस विधायक सुरेन्द्र पंवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पंवार यमुनानगर क्षेत्र में पैमाने पर अवैध उत्खनन करवाने का आरोप है। ईडी सुरेन्द्र पंवार को रिमांड के लिये अम्बाला के स्पेशल कोर्ट में ले जा रही है।
यह मामला यमुनानगर इलाके में सिंडिकेट द्वारा करीब 400-500 करोड़ रूपये के अवैध खनन से संबंधित है। हरियाणा पुलिस द्वारा अवैध खनन के संबंध में पंवार और अन्य के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की थी। जिसके बाद पिछले साल ईडी ने जांच अपने हाथ में ली थी। इस वर्ष जनवरी ईडी द्वारा आईएनएलडी से पूर्व एमएलए दिलबाग सिंह, सुरेन्द्र पंवार और अन्य सहयोगियों के यहां 20 ठिकानों पर छापे मारे गये थे। ईडी इस मामले में दिलबाग सिंह और कुलविंदर सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है।

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क्या जायेगी IAS पूजा खेड़कर की अफसरी, UPSC ने कराई FIR

नई दिल्ली. महाराष्ट्र कैडर की प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की परेशानी बढ़ गयी है। विवादों में घिरने के बाद संघ लोक सेवा आयोग () ने पूजा खेडकर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गयी है। इसके अलावा सिविल सेवा परीक्षा 2022 से उनकी उम्मीदवारों रद्द करने और भविष्य की परीक्षाओं से उन्हें रोकने के लिये कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

आयोग (UPSC) ने नोटिस जारी कर पूजा खेडकर से जवाब मांगा है कि आपकी उम्मीदवारी क्यों रद्द की जाए और आगामी यूपीएससी की परीक्षाओं से वंचित क्यों न रखा जाए. यूपीएससी की ओर से कहा गया है, ‘पूजा खेडकर के खिलाफ विस्तृत जांच कराई गई है. इसमें पता चला है कि उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2022 में नियमों का उल्लघंन किया था. उनकी परीक्षा में बैठने की लिमिट पूरी हो गई थी. इसके बाद उन्होंने फर्जी तरीके से अपनी पहचान बदलकर यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा दी. उन्होंने अपने नाम, पिता का नाम, मां का नाम, फोटो और साइन तक बदल डाले. इसके अलावा मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पता भी बदला. गलत तरीके से नई पहचान बनाने की वजह से उन्हें लिमिट से ज्यादा बार परीक्षा में बैठने का मौका मिला.’

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UP के गोंडा में बड़ी रेल दुर्घटना, डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के 6 कोच पटरी उतरी, 2 यात्रियों की मौत 40 घायल

गोंडा. उत्तरप्रदेश के गोंडा में गुरूवार की दोपहर बड़ा रेल हादसा हो गया है। यहां गोरखपुर होते हुए चंडीगढ़ से असम जा रही डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के 6 कोच पटरी से उतर गये। घटना में 2 यात्रियों की मौत हो गयी। जबकि कई लोगों के घायल होने की जानकारी है। घटना गोरखपुर रेल खंड के मोतीगंज बॉर्डर की है। घटना की खबर मिलते ही रेलवें के तमाम उच्च अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गये है और रेस्क्यू ऑपरेशन नम्बर भी जारी कर दिये हैं। घटना की वजह इस रूट से गुजरने वाली 11 ट्रेनें डायवट कर दी गयी है और 2 ट्रेन निरस्त कर दी गयी है।

घटना की सूचना मिलते ही रेलवे अफसर मौके पर पहुंच गए। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो गया है। SDRF टीम मौके पर है। ट्रेन के अंदर फंसे लोगों को बोगियां काट कर निकाला जा रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे के CPRO पंकज कुमार ने बताया, लोको पायलट ने एक्सीडेंट के पहले धमाके की आवाज सुनी थी। ट्रेन (15904) चंडीगढ़ से डिब्रूगढ़ जा रही थी। हादसा झिलाही रेलवे स्टेशन के बीच गोसाई डिहवा में हुआ। हादसा स्थल की अयोध्या से इसकी दूरी 30 किमी और लखनऊ से 130 किमी है। गुरुवार को ट्रेन रात 11.39 बजे चंडीगढ़ से रवाना हुई। दोपहर 2.37 बजे पलट गई।

हेल्पलाइन नम्बर
एलजेएन-8957409292, जीडी-8957400965
अपडेट
घटनास्थल पर मौजूद अधिकारी के अनुसार 2 लोगों की मौत हुई है। लगभग 20 यात्री घायल हुए हैं। घटनास्थल पर 40 सदस्यीय मेडीकल टीम है और 15 एम्बूलेंस तैनात की गयी है। अधिक मेडीकल टीम और एम्बूलेंस आ रही है।

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IAS प्रफुल्ल देसाई लोकोमोटर डिसेबिलिटी सर्टीफिकेट लेने से आरोपों के घेरे में फंसे

नई दिल्ली.एक तरफ पूजा खेड़कर मामला तूल पकड़ता जा रहा है वहीं दूसरी तरफ एक और घोटाला नजर आने लगा है। पूजा खेड़कर द्वारा कथित तौर पर फर्जी विकलांगता सर्टिफिकेट द्वारा प्रवेश पाने का आरोप है तो वहीं दूसरी ओर अन्य और भी आरोपों के घेरे में आ गए हैं। जिनमे मुख्य रूप से तेलंगाना के एक अधिकारी प्रफुल्ल देसाई जिन्होंने भी लोकोमोटर डिसेबिलिटी के अंर्तगत दाखिला लिया था, को साइक्लिंग करते हुए, टेनिस खेलते हुए और घुड़सवारी करते हर देखा जा सकता है। जिस पर उनकी तरफ से बयान आया है कि मुझे पोलियो हुआ था लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं चल या दौड़ नही सकता हूं। यहां बताना जरूरी है कि केवल पोलियो होने से विकलांगता सर्टिफिकेट प्रदान नही किया जाता बल्कि उसके फलस्वरूप होने वाली शारीरिक अक्षमता का आकलन करने के पश्चात ही विकलांगता सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है। खबरों के अनुसार को पूर्व अधिकारियों के बच्चों ने इस तरह को विकलंगता का लाभ लिया है। जिनकी जांच होनी चाहिए।
अभी हाल ही में मध्य प्रदेश में इस तरह के केस सामने आने के बाद लगभग सभी कर्मचारियों को पुनः जांच कराई गई जिसमे कई सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए और उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा।क्या यह सही समय नही है कि अब तक जितने लोगों ने इस तरह के सर्टिफिकेट से नौकरी प्राप्त की है इनकी पुनः जांच कराई जाए , ताकि यूपीएससी पर लग रहे प्रश्न चिन्ह दूर हो सकें और गलत तरीके से नौकरी प्राप्त किए गए लोगों पर कार्यवाही की जा सके और भविष्य में इस तरह के मामले सामने आ आएं।


वायरल तस्वीरें जिनसे दावे शुरू हुए
अपने इंस्टाग्राम हैंडल से वायरल हुई एक तस्वीर में देसाई हैदराबाद के एक टेनिस कोर्ट में अपने दोस्तों के साथ सेल्फी लेते हुए नज़र आए। एक अन्य तस्वीर में देसाई देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान में साइकिल चलाते हुए नज़र आए।
20 oct 2020
आईएएस अधिकारी की सबसे ज़्यादा वायरल इंस्टाग्राम फोटो केम्प्टी फॉल्स से 30 किलोमीटर साइकिल चलाते हुए थी। सोशल मीडिया यूज़र्स द्वारा शेयर की गई अन्य तस्वीरों में देसाई ऋषिकेश में एक नदी पर राफ्टिंग करते और घोड़े पर सवार दिखाई दिए। देसाई की तस्वीरों की आलोचना करते हुए एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “UPSC में किसी तरह की जादुई शक्ति है। एक IAS अधिकारी जो चयन से पहले ऑर्थोपेडिक रूप से विकलांग था, अब नदी में राफ्टिंग, साइकिल चलाना और मीलों तक ट्रेकिंग करते हुए देखा जा सकता है। AIIMS का प्रचार किया जा रहा है। UPSC असली अस्पताल है।”
6 dec 2020
आलोचनाओं के बीच देसाई का स्पष्टीकरण
अपने दोस्तों के साथ बैडमिंटन खेलते हुए वायरल तस्वीर पर देसाई ने कहा, “मैं नियमित बैडमिंटन खिलाड़ी नहीं हूं, लेकिन कुछ बार, मैं अपने बैचमेट्स के साथ वहां गया हूं। मेरी विकलांगता का मतलब यह नहीं है कि मैं बिल्कुल नहीं चल सकता और मैं दोस्तों के साथ थोड़ा खेलने की कोशिश करता हूं।” दिसंबर 2020 में पहाड़ों में 25 किलोमीटर तक साइकिल चलाने और ट्रेकिंग करने की वायरल तस्वीर पर देसाई ने कहा, “इस विकलांगता के साथ, मैं अपने एक पैर से पैडल मार सकता हूं और दूसरे का सहारा ले सकता हूं। हमने उस दिन मसूरी से केम्प्टी फॉल्स तक साइकिल से यात्रा की, लेकिन मैंने पूरी यात्रा साइकिल से नहीं की।”
6 oct 2020
उन्होंने कहा, “मैं अपने दोस्तों के साथ पैदल चला। पहाड़ों में ट्रेकिंग करना हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा था और उसके बाद के ट्रेकिंग रूट पर ढलान के कारण साइकिल चलाने की ज़रूरत नहीं थी। यहां तक कि राफ्टिंग करते हुए मेरी जो तस्वीर शेयर की जा रही है, वह भी हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा है।” अक्टूबर 2020 में घुड़सवारी की तस्वीर के बारे में, आईएएस अधिकारी ने कहा कि यह अभ्यास उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा था और स्पष्ट किया कि उनके प्रशिक्षक भी उनके साथ मौजूद थे और घर संभाल रहे थे।
कौन है प्रफुल्ल देसाई
देसाई ने कहा कि वह कर्नाटक के बेलगावी जिले के एक किसान परिवार से हैं। अपनी विकलांगता के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब वह पाँच साल के थे, तब उनका बायाँ पैर पोलियो से संक्रमित हो गया था। उन्होंने कहा कि उनका बायाँ पैर पूरी तरह से लकवाग्रस्त नहीं था, लेकिन उसमें थोड़ी-बहुत विकलांगता थी। UPSC में शामिल होने से पहले, देसाई ने कर्नाटक सिंचाई विभाग में सहायक अभियंता के रूप में काम किया, जहाँ उन्होंने लगभग तीन महीने तक काम किया।
देसाई ने 2017 में अपना पहला UPSC प्रयास किया, लेकिन प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर पाए। 2018 में, उन्होंने अपना दूसरा प्रयास किया और UPSC पैनल द्वारा साक्षात्कार पास कर लिया। चूँकि देसाई ने शारीरिक विकलांगता कोटे के तहत आवेदन किया था, इसलिए UPSC ने उनके लिए AIIMS के मेडिकल बोर्ड की देखरेख में मेडिकल टेस्ट से गुजरना अनिवार्य कर दिया। मेडिकल टेस्ट बोर्ड ने उन्हें 40 प्रतिशत के साथ बेंचमार्क विकलांगता का प्रमाण पत्र प्रदान किया। हालाँकि, मुख्य परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने के कारण, वह दूसरे प्रयास में अधिकारी नहीं बन सके।
उनके प्रयासों का फल तब मिला जब 2019 में तीसरे प्रयास में वे IAS अधिकारी बनने में सफल हुए। देसाई ने सभी UPSC परीक्षाएँ पास कीं और अखिल भारतीय स्तर पर 532वीं रैंक हासिल की। उन्होंने AIIMS में अनिवार्य मेडिकल बोर्ड परीक्षा पास की। वे 45 प्रतिशत विकलांगता के साथ एक प्रमाणित बेंचमार्क व्यक्ति थे।

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इन नौकरियों में मिलेगा 100%आरक्षण से मचेगा बवाल

बेंगलुरू. आरक्षण को लेकर देश-विदेश में अलग-अलग तेवर देखने को मिल रहे हैं। मराठा आरक्षण को लेकर जहां महाराष्ट्र में मनोज जरांगे पाटिल हालिया दौर में अनशन करते हुए दिखाई दिये है। वहीं 16 जुलाई को बंगलादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के एक फैसले पर बवाल कट गया और 6 लोग मारे गये।
इस दौरान कर्नाटक सरकार ने नौकरियों में आरक्षण को लेकर एक विधेयक को मंजूरी दे दी है। दरअसल, राज्य मंत्रिमंडल ने राज्य में निजी कंपनियों में ग्रुप -सी और डी के पदों के लिये कर्नाटकवासियों को शत-प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान वाले एक विधेयक को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने यह जानकारी दी है।
आरक्षण में प्रावधान
मैनेजर या मैनेजमेंट लेवल के पदों पर 50प्रतिशत आरक्षण होगा। यानी कि इन पदों पर आधे कन्नड लोगों की भर्ती होगी।
गैर-मैनेजमेंट वाली नौकरियां में 75प्रतिशत आरक्षण होगा। इसका मतलब है कि गैर-मैनेजमेंट वाली भर्तियों में तीन-चौथाई कन्नड उम्मीदवार को रखा जायेगा।
कौन है स्थानीय निवासी
इस बिल में स्थानीय को पारिभाषित करते कहा गया है कि स्थानीय वह है जो कर्नाटक में जन्मा हो, 15 वर्षो से राज्य में निवास कर रहा हो और स्पष्ट रूप से कन्नड़ बोलने, पढ़ने और लिखने में सक्षम हो। बिल में कहा गया है कि यदि अभ्यर्थियों के पास कन्नड़ भाषा का माध्यमिक विद्यालय का प्रमाण पत्र नहीं है तो उन्हें ‘‘नोडल एजेंसी’’ की तरफ से लिये जाने वाले कन्नड़ प्रवीणता परीक्षा पास करनी होगी।
ग्रुप सी-डी कैटेगरी में कौन सी नौकरियां आती है
ग्रुप डी कैटेगरी में आने वाली नौकरियों में ड्राइवर, चपरासी, क्लीनर, माली, बार्बर और रसोइया आते हैं। जबकि ग्रुप -सी में सुपरवाइजर, क्लर्क असिस्टेंट, स्टेनोग्राफर, टैक्स असिस्टेंट, हेड क्लर्क, मल्टी टॉस्ंिकग स्टाफ, स्टोर कीपर, कैशियर जैसी नौकरियां आती हैं। इसके अलावा कई तरह के टेक्नीकल और नॉन-टेक्नीकल पोस्ट भी इसी कैटेगरी में आती है।

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हारे प्रत्याशी करा सकेंगे EVM डाटा और VVPAT पर्चियों को मिलान -चुनाव आयोग

नई दिल्ली. लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिये चुनाव आयोग ने एक और प्रावधान किया है। इस प्रावधान के अनुसार मतदान में गड़बड़ी की आशंका वाले (मतदान और मतगणना से असंतुष्ट) प्रत्याशी किसी भी मतदान केन्द्र की कोई भी EVM जांच के लिये चुन सकते हैं। जिनका डाटा और VVPAT पर्चियों का मिलान किया जा सके। आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव के परिणाम 4 जून को आने केबाद से निर्वाचन आयोग को अभी तक 8 उम्मीदवारों की शिकायतें और दोबारा मिलना के आवेदन आ चुके हैं। इनमें मशीन, डाटा, गिनती, मिलान और माइक्रोचिप से गड़बड़ी या छेड़छाड़ की आशंकायें जताई गयी है।
चुनाव आयोग ने किया ऐलान
चुनाव आयोग ने एसओपी जारी कर चुनाव में दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाले उम्मीदवारों को यह सुविधा देने का ऐलान किया है। नियमानुसार किसी भी हलके में कुल ईवीएम -वीवीपैट सैट की संख्या के 5 प्रतिशत का मिलान औचक तौर किया जाता है। इस संख्या के दायरे में ही उम्मीदवार अपनी विश्ष्टि पसंद के बूथ और ईवीएम की क्रम संख्या बताते हुए जांच का अनुरोध समुचित शुल्क चुकाकर कर सकते हैं।
एडवांस जमा करनी पड़ेगी रकम
आयोग के अधिकारियों के मुताबिक लोकसभा चुनाव के दौरान EVM  और VVPAT के मेमोरी वेरिफिकेशन के लिए प्रति मशीन 40 हजार रुपए और उस पर 18 फीसदी का GST  एडवांस जमा करना पड़ता है। आयोग के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम सभी के सामने डाटा वेरिफाई करती है।  अगर शिकायत सही मिली यानी ईवीएम डाटा और पर्चियों के बीच अनियमितता यानी गड़बड़ पाई गई तो कार्रवाई होगी और शिकायतकर्ता को पूरा शुल्क वापस किया जाएगा।  शिकायत सही नहीं हुई तो शुल्क जब्त हो जाएगा।
नहीं किया जाएगा 100% मिलान
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ के 26 अप्रैल को आए फैसले के मुताबिक मतगणना से सात दिनों के भीतर वेरिफिकेशन की अर्जी लगानी आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने 26 अप्रैल को दिए अहम फैसले में साफ कर दिया था कि मतदान EVM मशीन से ही उचित हैं. EVM-VVPAT का 100 फीसदी मिलान नहीं किया जाएगा। ईवीएम के आंकड़े यानी मेमोरी और वीवीपैट की पर्ची 45 दिनों तक सुरक्षित रखी जाएगी। ये पर्चियां उम्मीदवारों या उनके एजेंट के हस्ताक्षर के साथ सुरक्षित रहेगी।
शिकायत सही होने पर खर्च मिलेगा वापस
कोर्ट का निर्देश है कि चुनाव के बाद सिंबल लोडिंग यूनिटों को भी सीलकर सुरक्षित किया जाए. यह भी निर्देश दिया गया है कि उम्मीदवारों के पास नतीजों की घोषणा के बाद टेक्निकल टीम द्वारा ईवीएम के माइक्रो कंट्रोलर प्रोग्राम की जांच कराने का विकल्प होगा, जिसे चुनाव घोषणा के सात दिनों के भीतर किया जा सकेगा। यह फैसला सुनाते हुए जस्टिस खन्ना ने कहा कि वीवीपैट वेरिफिकेशन का खर्चा उम्मीदवारों को खुद ही उठाना पड़ेगा. अगर किसी स्थिति में ईवीएम में छेड़छाड़ पाई गई तो खर्च वापस दिया जाएगा। वहीं, इस दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि किसी सिस्टम पर आंख मूंदकर अविश्वास करने से संदेह ही पैदा होता है. लोकतंत्र का मतलब ही विश्वास और सौहार्द बनाए रखना है।

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OPS-ओल्ड पेंशन की मांग पर केन्द्रीय कर्मचारियों देगी 50% पेंशन

OPS: ओल्‍ड पेंशन की मांग पर आया बड़ा अपडेट, मोदी सरकार केंद्रीय कर्मचार‍ियों को देगी 50% पेंशन!

नई दिल्ली. ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) अगर आप भी रिटायरमेंट के बाद पेंशन के लिये एनपीएस में निवेश कर रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है। हां केन्द्रीय कर्मचारियों और अलग-अलग राज्य सरकार के कर्मचारियों की ओर से लम्बे समय से ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने की मांग चल रही है। सरकारी कर्मचारियों की मांगों को मानते हुए पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, राजस्थान और झारखंड में ओपीएस को बहाल भी कर दिया था। लेकिन केन्द्र सरकार ने इसकी बहाली से मनाकर दिया था। इसके बावजूद भी लाखों कर्मचारी अपनी मांग पर अड़े हुए है।
सरकार कर्मचारियों को 50%  पेंशन का देगी भरोसा
कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद NPS के तहत तय फायदा नहीं मिलता, जबकि ओपीएस में कर्मचारी को एक फिक्स पेंशन मिलती है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि NPS  के तहत आने वाले केन्द्रीय कर्मचारियों को यह विश्वास दिलाया जाये कि उन्हें रिटायरमेंट के बाद OPS जैसा ही फायदा मिलेगा। सरकार यह कोशिश कर रही है कि नेशनल पेंशन स्कीम के तहत आने वाले कर्मचारियों को रिटायर होने के बाद हर माह जितना वेतन मिलता था उसका 50%  पेंशन के रूप में दिया जायेगा।
सरकार अब 50% पेंशन की गारंटी देने का कर रही है विचार
रिटायरमेंट के बाद जमा की गयी राशि के आधार पर ही कर्मचारियों को पेंशन मिलती है। सोमनाथन कमेटी ने दुनियाभर के देशों की पेंशन स्कीम और आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से किये गये बदलावों का अध्ययन किया है और साथ ही यह कमेटी इस बात की भी स्टडी कर रही है। अगर सरकार पेंशन पर एक निश्चित राशि की गारंटी देती है तो क्या असर होगा। स्टडी से यह साफ हुआ है कि केन्द्र सरकार के लिये 40-50%  पेंशन की गारंटी देना मुमकिन है। लेकिन इससे 25-30 वर्ष तक काम करने वाले कर्मचारियों की चिंता दूर नहीं होगी। इसलिये सरकार अब 50प्रतिशत गारंटी देने का विचार कर रही है।
नयी व्यवस्था में सरकार एक फंड बनायेगी
इसका सीधा सा मतलब यह हुआ है कि यदि पेंशन के लिये पैसा कम पड़ता है तो सरकार की ओर उसे पूरा किया जायेगा और साथ ही हर वर्ष अनुमान लगाना जरूरी होगा। कुछ कमेटी मेम्बर का कहना है कि सरकारी पेंशन योजना में केन्द्र सरकार के पास रिटायरमेंट फंड नहीं होता। नयी व्यवस्था में शायद सरकार एक फंड बनायेगी। इस फंड में हर वर्ष पैसा जमा किया जायेगा। ठीक उसी तरह जैसे कंपनियों अपने कर्मचारियों के लिये रिटायरमेंट बेनीफिट्स के लिये फंड बनाती है।

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2 हजार पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश, खुदाई में 94 से अधिक मूर्तियां मिली, मुस्लिम बोले फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा

वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के लिए हिंदू पक्ष को भोजशाला में पूरे दिन पूजा और हवन करने की अनुमति है। ये हवन कुंड भोजशाला के बीच में है।

इन्दौर. धार की भोजशाला मंदिर है या मस्जिद? इस प्रश्न के उत्तर तलाशने के लिये 98 दिन वैज्ञानिक सर्वे किया गया है। भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण (एएसआई) के वकील हिमांशु जोशी ने सोमवार को रिपोर्ट इन्दौर हाईकोर्ट में पेश कर दी है। यह रिपोर्ट मीडिया से शेयर नहीं करने के निर्देश सभी पक्षों को दिये गये है। हिमांशु जोशी ने बताया है कि रिपोर्ट 2 हजार पन्ने की है।इसमें सर्वे और खुदाई के दौरान मिले 1700 से अधिक प्रमाण/अवशेष पाये गये है। हाईकोर्ट इस पर 22 जुलाई को सुनवाई करेगा।
हिन्दू पक्ष के वकील हरिशंकर जैने ने दावा किया है कि भोजशाला की सर्वे रिपोर्ट से हिन्दू पक्ष का दावा 100 प्रतिशत साबित हो रहा है। यहां 94 आर्टिकल्स मिले है। इनमें टूटी मूर्तियां शिलालेख और संस्कृत के श्लोक भी लिखे है। इसमें प्रतीत होता है कि यहां मां वाग्देवी मंदिर ही था और धार्मिक शिक्षा दी जाती थी। अलग-अलग टाइम के लगभग 30 सिक्के भी इनमें शामिल है।


फैसला सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर ही होगा
धार के शहर काजी वकार सादिक ने दैनिक भास्कर से कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि ASI की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट स्तर से कोई एक्शन नहीं लिया जा सकता है। हाईकोर्ट में 22 जुलाई को सुनवाई है, लेकिन फैसला सुप्रीम कोर्ट स्तर से ही करना है। उन्होंने कहा कि सुनने में आया है कि रिपोर्ट पक्षकारों को दी जा रही है। रिपोर्ट की गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश भी सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे, ऐसे में पक्षकारों को रिपोर्ट दी जानी थी या नहीं, इस तथ्य पर भी जानकारी ले रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि कोई भी पक्ष रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करेगा, ताकि अमन कायम रहे।
परमारकालीन मूर्तियां भी मिलीं-याचिकाकर्ता
हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने दावा किया कि यह इमारत राजा भोज के काल की ही साबित होगी, जिसे वर्ष 1034 में बनाया गया था। ASI को इस सर्वे में कई प्राचीन मूर्तियां मिली हैं, जो परमारकालीन हो सकती हैं। इस तरह ये परमारकालीन इमारत है।अवशेषों से लगभग तय माना जा रहा है कि इसका निर्माण 9वीं से 11वीं शताब्दी के बीच का है। एक गर्भगृह के पास ईंटों से बनी 27 फीट लंबी दीवार भी मिली है। पुरातत्वविदों का मानना है कि ईंटों से निर्माण और भी प्राचीन समय में होता था। मोहन जोदड़ो सभ्यता के समय, यानी यह स्थान और भी प्राचीन हो सकता है।

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FORT स्थित सिंधिया स्कूल में यौन शोषण

ग्वालियर. किले स्थित सिंधिया स्कूल में आई एक खबर ने देशभर के उन परिवारों के बच्चों की चिंता में डाल दिया है। जिनके बच्चे इस देश के प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ते हैं। सिंधिया बॉयज स्कूल में कक्षा 9वीं के छात्र ने कक्षा 7वीं में पढ़ने वाले एक छात्र को अपनी हवस का शिकार बनाया है। आरोपी छात्र के खिलाफ स्कूल के प्राचार्य की शिकायत पर बहोड़ापुरा थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। आरोपी छात्र की इस हरकत की खबर उसके अभिभावकों को दे दी गयी है। फिलहाल जब तक दोनों ही बच्चों के अभिभावक नहीं आ जाते तब तक स्कूल प्रबंधन ने दोनों ही बच्चों को अलग-अलग कमरे में अपनी कड़ी निगरानी में रखा है। स्कूल परिसर में घटी इस घटना ने स्कूल के सिस्टम -प्रबंधन पर संवालिया प्रशन चिन्ह खड़ा कर दिया है। क्योंकि पूरे देश के धनाढ्य और रसूखदार परिवारों के बच्चों को इस स्कूल में पढ़ने का अवसर मिलता है।
छात्र की हरकत पर सब मौन
सिंधिंया स्कूल में इतनी बड़ी घटना घट जाने के बाद सभी मौन है। स्कूल प्राचार्य से लेकर स्कूल में हॉस्टल की देखरेख करने वाले वॉर्डन और स्कूल में तमाम गतिविधियों के संचालन के लिये गठित समितियों में शामिल लोगों के मोबाइल बंद मिल रहे है। वहीं पुलिस भी इस मामले में पूरी तरह से खामोशी का रवैया अपनाये हुए है। थाना प्रभारी से लेकर आला अधिकारी तक इस पूरे मामले पर या तो बात ही नहीं कर रहे हैं या अनभिज्ञता जता रहे हैं। वहीं स्कूल प्रबंधन ने बताया है कि घटना के बाद दोनों ही बच्चों के अभिभावकों को टेलीफोन करके कहा गया है कि वह जल्द से जल्द स्कूल पहुंच जाये ।तब तक दोनों ही बच्चों को अस्पताल के ही अलग-अलग कमरों में रखा गया है।
यह हुआ अस्पताल में
एफआईआर में कहा गया है कि जब डॉक्टर ने दोनों ही बच्चों को स्वास्थ्य केन्द्र में आराम करने के लिये कहा तो कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले छात्र ने कक्षा 7वीं कक्षा के छात्र को विवश किया िकवह जैसा करना चाहता है, वैसा ही करते रहने दे। इसके बाद बेड पर उसके शॉटर््स खोलने की कोशिश की। किसी बहाने से बॉथरूम में बुलाया और 7वीं में पढ़ने वाले दात्र का आरोप है कि यहीं पर उसके सीनियर ने उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाये और इतना ही जब उसने चिल्लाने की कोशिश की तो उसने उसका मुंह भी दबा दिया। उसने इसकी खबर सबसे पहले अस्पताल की नर्स को दी। उसने डॉक्टर को बताया औरा यह बात तत्काल ही स्कूल चलाने वालों तक पहुंच गयी।
एफआईआर दर्ज
इस पूरे मामले की शिकायत स्कूल के प्राचार्य अजय सिंह पुत्र कालिका सिंह ने बहोड़ापुर थाने में दर्ज करवाई है। चूंकि मामला काफी हाई प्रोफाइल होने की वजह से बहोड़ापुर थाने तत्काल ही घटना के बार आला अधिकारियों के संज्ञान में लाये और केस दर्ज करने में कोई देरी नहीं की और इसके साथ ही पुलिस ने जो काम किया वह इस मामले को लेकर पूरी तरह से मौन साधन का रहा है। यह घटना 13 जुलाई की है। घटना स्कूल परिसर स्थित स्वास्थ्य केन्द्र में घटी। दोनों ही बच्चे अपनी-अपनी समस्या लेकर स्वास्थ्य केन्द्र में तैनात डॉक्टर लेविन गोविडर से मिलने गये थे।
रैगिंग से आया था स्कूल सुर्खियों में
यह कोई पहला मौका नहीं है जब हाईप्रोफाइल सिंधिया स्कूल की छवि पर धब्बा लगा हो। लगभग 7 वर्ष पूर्व यह स्कूल उस वक्त सुर्खियों में आया था जब इस स्कूल में रैंगिंग का कांड उछला था। हालांकि तब भी स्कूल प्रबंधन ने कांड को पूरा दबाने की कोशिश की थी पर वह मामले को जितना भी दबाते, मामला उतना खुलकर सामने आता गया। सिंधिया स्कूल में होने वाली गतिविधियों की परत दर परत उधड़ती चली गयी थी।

 


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