डिजीटल अरेस्ट का डर दिखाकर दुबई भेजे जाते थे करोड़ों रूपये, आरोपी जमानत खारिज, हाईकोर्ट ने माना गंभीर आरोप
जबलपुर. एमपी हाईकोर्ट ने डिजीटल अरेस्ट के मामले में केरल निवासी अब्दुल रहमान की जमानत याचिका खारिज कर दी गयी हे। हाईकोर्ट ने कहा है कि यह एक गंभीर अपराध है। इसलिये आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती है। दरअसल, आरोपी अब्दुल रहमान ने भोपाल के एक व्यक्ति को डिजीटल अरेस्ट करते हुए 69 लाख रूपये की ठगी की थी। जांच के दौरान भोपाल क्राइम ब्रांच ने उसे मार्च 2024 में केरल से गिरफ्तार कर भोपाल न्यायालय में पेश किया था। तभी से वह न्यायिक हिरासत में है। हालांकि इस मामले में गिरफ्तार 2 अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।
आरोपी ने एमडी ड्रग्स के नाम पर की ठगी
भोपाल के एक व्यक्ति के पास कॉल आया। जिसमें कहा गया है कि उसके घर एक पार्सल पहुंचा है। जिसमें एमडी पाउडर मिला है। कॉलर ने स्वयं को पुलिस अधिकारी बताते हुए धमकाया है कि उसके खिलाफ मामला दर्ज होगा और जल्द ही एक टीम उसे गिरफ्तार करने भोपाल पहुंचेगी। डर की वजह से व्यक्ति ने कॉलर के खाते में 69 लाख रूपये ट्रांसफर कर दिये। शिकायत मिलने पर क्राइम ब्रांच ने जांच की और केरल निवासी अब्दुल रहमान को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि उसने अपने 2 साथियों के साथ मिलकर आधार आईडी के जरिये पीडि़त को फंसाया और डिजीटल अरेस्ट का डर दिखाकर उससे पैसे ठगे। पीडि़त को 200 मिलीग्राम एमडीए ड्रग्स भेजने के नाम पर धमकाया गया था।
गंभीर अपराध, जमानत याचिका खारिज
हाईकोर्ट के जस्टिस पीके अग्रवाल ने आरोपी की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि यह गंभीर अपराध है। आरोपी और उसके गिरोह ने कई लोगों को ठगा है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी पाया कि ठगी के रुपए दुबई भेजे जाते थे।
दुबई से जुड़े हैं आरोपी के तार
सरकारी वकील सीएम तिवारी ने कोर्ट को बताया कि अब्दुल रहमान एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का सदस्य है। उसके संबंध सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के अपराधियों के साथ-साथ दुबई तक हैं। आरोपी इंडियन करेंसी को दुबई भेजता था। एनसीआरपी पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, इस गिरोह ने अब तक 14 लोगों से 3 करोड़ 43 लाख रुपए की ठगी की है।
