150 वर्ष पुराने नागमंदिर पर श्रद्धालुओं की लगी भीड़, बाहर लगे मेले
ग्वालियर. शुक्रवार को नागपंचमी पर नागमंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली है। नागपंचमी के मौके पर छत्री बाजार और दौलतगंज स्थित नागदेवता मंदिरों पर सुबह से श्रद्धालु दर्शन के लिये पहुंचे। भक्तों के मंदिर पहुंचने का यह सिलसिला शाम तक जारी रहेगा। नागदेवता मंदिरों के बाहर मेले भी लगाये गये हैं।
छत्री मंदिर स्थित नागदेवता मंदिर के लगभग 150 वर्ष पुराना है। इस मंदिर की मान्यता है कि अगर किसी व्यक्ति पर कालसर्प दोष या राहु की महादशा चल रही है। वह इस मंदिर पर आकर नागदेवता की पूजा अर्चना कर दर्शन करें तो उसकी हर समस्या दूर हो जाती है।
प्रेम के प्रतीक है नाग मंदिर
इस मंदिर की कहानी काफी रोचक है। 31 जनवरी 2015 में ट्रांसपोर्ट नगर में गेट नम्बर 1 के पास नाग-नागिन रोड पार कर रहे थे। इस दौरान ट्रक के नीचे आ जाने से नाग की मौत हो गयी थी। नाग की मौत के बाद नागिन वहींे रोड़ पर बैठ गयी थी। कई लोगों ने नागिन को हटाने का प्रयास किया था पर नागिन टस से मस नहीं हुई थी।
घटना के आगरा मुंबई राजमार्ग के दोनों ओर लम्बा जाम लग गया था, प्रशासन ने मशक्कत के बाद सांप पकड़ने वालों की मदद से नागिन को वहां से हटाया तो बाद में नागिन को जंगल में ले जाकर छोड़ दिया था। लेकिन दूसरे दिन नागिन ने भी नाग के मरने की जगह पर आकर दम तोड़ दिया। यह कहानी नहीं एक हकीकत है। नाग-नागिन के इसी प्रेमी जोड़े का मंदिर भी बनवाया गया है। जहां हिन्दू मुस्लिम एक साथ पूजा करते हैं।
नाग देवता सभी के कष्ट हरते हैं
नाग देवता मंदिर के पुजारी विनायक सर के का कहना है कि मंदिर डेढ़ सौ साल पुराना है। मंदिर की मान्यता है कि किसी पर भी कालसर्प दोष या राहु की महादशा हो अगर वह मंदिर पर दर्शन करने आए और पूजा अर्चना करे तो उसका दोष खत्म हो जाता है।
