दिग्विजय बोले कि आस्तीन के सांपों से रहें सचेत, कार्यकर्त्ताओं को दी नसीहत, अरूण यादव ने भी किया समर्थन
ग्वालियर. शुक्रवार को सिंधिया के गढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने आस्तीन के सांपों से अलर्ट रहने की सलाह कांग्रेस कार्यकर्त्ताओं को दी। उन्होंने कहा है कि आज आदिवासी दिवस और नागपंचमी है। आज नागपंचमी पर नाग की पूजा करें। लेकिन आस्तीन के सांपों से सचेत रहें। दिग्विजय सिंह का यह स्टेंटमेंट किसके लिये था। यह तो सभी समझ गये हैं। लेकिन उनका बयान अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। कार्यकर्त्ताओं से मुलाकात करने के बाद वह भिंड के लहार के लिये रवाना हो गये हैं।
बयानों से सुर्खियों में रहते हैं दिग्विजय सिंह
ग्वालियर आये पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सदैव अपने बयानों के लिये सुर्खियों में रहते हैं। शुक्रवार को उनको भिंड के लहार में पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की कोठी को तोड़ने के विरोध में किये जा रहे धरना प्रदर्शन में शामिल होने के लिये आये थे। शुक्रवार की सुबह वह भोपाल से ग्वालियर पहुंचे थे। यहां उन्होंने लहार रवाना होने से पहले सिटी सेंटर स्थित होटल सेंट्रल पार्क में कार्यकर्त्ताओं से मुलाकात की है। यहां मुलाकात के दौरान उन्होंने कार्यकर्त्ताओं को कि आज 2 दिवस है। एक आदिवासी दिवस और दूसरा नागपंचमी है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कार्यकार्यर्त्ताओं से कहा कि नागपंचमी पर नागदेवता की पूजा करें। लेकिन आस्तीन के सांपों से सचेत से भी सचेत रहें।
अरुण यादव ने भी सांप वाले बयान का किया समर्थन
राज्य सभा सदस्य दिग्विजय सिंह के बायन पर जब पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव यादव से बात की तो उन्होंने भी बयान का समर्थन किया है। अरुण यादव ने कहा है जो राजा साहब ने बात कही है, वो सच है। हमें ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। हालांकि अपने सार्वजनिक बयान पर दिग्विजय सिंह बिना कुछ बोले चल दिए।
सिंधिया के गढ़ में इस बयान के क्या मायने
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हमेशा बयानों को लेकर चर्चाओं में रहते है। शुक्रवार को भी ग्वालियर में उन्होंने ऐसा बयान दे दिया है, जो साेशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दिग्विजय सिंह ने कांग्रेसियों को नसीहत दी है कि आज नागपंचमी है, इसलिए नाग की पूजा करो, लेकिन आस्तीन के सांपों से सचेत रहो। ये बयान ग्वालियर में दिया है। इसके कई मायने भी है। क्योंकि यहीं, से कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराने का काम किया गया था। साथ ही, विधानसभा हो, या लोकसभा चुनाव, देखा गया है कि चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के बड़े नेता आखिरी समय पर बीजेपी में शामिल हो रहे हैं।
