दिग्गज जौहरी भगवान जगन्नाथ मंदिर के खजाने अनुमान तक नहीं लगा सके थे, 1978 में हुई दुर्लभ रत्नों की गणना
नई दिल्ली. ओडिशा में भगवानर जगन्नाथ मंदिर का खजाना 46 वर्षो के बाद खोला गया। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा विराजमान है। 12वी सदी में बने इस मंदिर के रत्न भंडार में कई दुर्लभ रत्न, सोने-चांदी के ज्वेलरी मौजूद है। इनमें भगवान के कीमती जेवरात बर्तन, राजाओं के मुकुट और भक्तों के द्वारा दान में दी गयी सोने-चांदी की बेशकीमती चीजें शामिल हैं।
वर्ष 1978 में जगन्नाथ मंदिर के खजाने को जब खोला गया था तो रत्नों की कीमत का आकलन करने में लिये जौहरी बुलाये गये थे। लेकिन वह भी खजाने की कुल कीमत का अंदाजा नहीं लगा सके थे। उस समय खजाने की गणना के लिये मुंबई और गुजरात से जौहरी आये थे जो खजाने में मौजूद दुर्लभ रत्नों को देख कर हैरान रह गये थे।
