थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण प्रोजेक्ट अब ईओडब्ल्यू की जांच में फंस गया,टेंडर के विवाद के बाद 150 आवासों का निर्माण कार्य रुका

ग्वालियर. ठेकेदार कंपनी को जीएसटी का फायदा पहुंचाने के मामले में चर्चा में आया थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण प्रोजेक्ट अब ईओडब्ल्यू की जांच में फंस गया है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 160 करोड रुपये के कार्यों के टेंडर में ऐनवक्त पर ठेकेदार को बोर्ड द्वारा जीएसटी का भुगतान करने की शर्त जोडकर दिल्ली की एक कंपनी को फायदा पहुंचाने की शिकायतें हुई थी। मामले की जांच जर्ब अओडब्ल्यू ने शुरू की तो अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। तबसे लेकर अभी तक इस प्रोजेक्ट का काम बंद पडा हुआ है। सिर्फ पहले चरण के तहत शुरू कराए गए कर्मचारियों के आवास और स्कूल बिल्डिंग निर्माण का काम ही धीमी गति से चल रहा है।
ठेकेदार कंपनियों को जमा करनी थी जीएसटी की राशि
थाटीपुर पुनघर्नत्वीकरण परियोजना में वर्तमान में जो आवास तैयार हो रहे हैं, वो शासकीय परियोजना के अंतर्गत हैं। ऐसे में ठेकेदार कंपनियों को ही जीएसटी की राशि जमा करनी थी। 160 करोड़ रुपये की राशि का टेंडर भी इसी शर्त के साथ जारी किया गया था, लेकिन ऐनवक्त पर शर्त में बदलाव कर जीएसटी की राशि का भुगतान बोर्ड द्वारा करने की शर्त जोड़ दी गई। इसके बाद दिल्ली की कंपनी श्रीवर्द्धन इंफ्रा प्राइवेट प्रोजेक्ट दिल्ली को ठेका भी दे दिया गया। मामले की शिकायत जब ईओडब्ल्यू में पहुंची, तो पूरी प्रक्रिया को होल्ड पर डाल दिया गया। इस मामले में ईओडब्ल्यू के भोपाल स्थित मुख्यालय में शिकायत हुई कि 160 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में 18 प्रतिशत जीएसटी बोर्ड पर डालने से अब सरकार को 28.80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा। इस प्रकार प्रोजेक्ट की लागत भी 188.80 करोड़ रुपये हो गई। ईओडब्ल्यू द्वारा इस मामले में जांच शुरू करने पर बोर्ड के मुख्यालय स्तर से टेंडर निरस्त कर दिया गया। इसके बाद से काम बंद पड़ा हुआ है।
25 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हुआ है
थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना में किसी न किसी विवाद के चलते काम में अड़ंगे लग रहे हैं। पहले हरे-भरे पेड़ों को काटने के मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर होने से काम प्रभावित हुआ। इसके बाद शासकीय आवासों को खाली कराने पर भी कई बार विरोध का सामना करना पड़ा। जैसे-तैसे आवास खाली हुए, तो स्कूल और पार्क का काम शुरू कराया गया। अभी तक सिर्फ यही काम हो पाया है, जबकि यहां शासकीय कर्मचारियों के लिए फ्लैट और कमर्शियल काम्प्लेक्स भी तैयार होने हैं। इस प्रोजेक्ट का अभी 25 फीसद काम भी पूरा नहीं हो सका है।
160 करोड़ से बनने हैं आवास, राजस्व भी अटका
जीएसटी का विवाद थमने के बाद नए सिरे से प्रोजेक्ट को तैयार कराया गया है। इसमें थाटीपुर इलाके में हाउसिंग बोर्ड द्वारा 160 करोड़ रुपये की लागत से 150 आवास तैयार कराए जाएंगे। ये आवास दो मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में तैयार होंगे। हर बिल्डिंग में 75-75 फ्लैट तैयार किए जाने हैं। इनमें टू बीएचके और थ्री बीएचके फ्लैट शामिल हैं। इन फ्लैटों को हाउसिंग बोर्ड द्वारा हितग्राहियों को बेचा जाएगा। यदि इस प्रोजेक्ट को समय से शुरू कराया जाता, तो बोर्ड को बुकिंग के रूप में हितग्राहियों से राजस्व भी मिलता, लेकिन अब यह पूरी प्रक्रिया ठप हो गई है। अब आचार संहिता के बाद नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया की जाएगी। ऐसे में निर्माण कार्य जुलाई या अगस्त माह में ही शुरू हो पाएगा।
नए सिरे से प्रक्रिया करेंगे थाटीपुर योजना में पूर्व में किए गए टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। वहां 150 फ्लैटों का निर्माण किया जाना है। इसके लिए दोबारा से टेंडर किए जाएंगे। यह काम आचार संहिता के बाद ही होगा।
-नीरू राजपूत, कार्यपालन, यंत्री, हाउसिंग बोर्ड

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *