240 इजरायली हमास के कब्जे से होंगे आजाद, कतर बिचौलिया की भूमिका में, अमेरिकी प्रेशन और जिनपिंग की डिप्लोमेसी, दुश्मन हमास की शर्ते मानने को तैयार नहीं इजरायल
नई दिल्ली. गाजा में अंतहीन इजरायली बमबारी, अस्पतालों पर रॉकेट से हमला और फिलिस्तिनियों की मौतों के बढ़ते आंकड़ों केू बीच इस सीजफायर का इंतजार सभी को था। गाजा की ओर से कई पेशकश हुए लेकिन इजरायल शर्तो पर राजी नहीं हो रहा था। जिन शर्तो पर इजरायल राजी था वह तो बाते हमास को मंजूर नहीं थी। लिहाजा इजररायल-हमास युद्ध में 4 दिन के इस युद्धविराम से दुनिया भर के दिग्गज नेताओं ने राहत की सांस ली है। इस युद्धविराम के महत्वको इसी से समझा जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने स्वयं इजरायली प्रधानमंत्री केो इसके लिये थैंक्यू कहा है कि इसके अलावा बाइडेन ने कतर के राष्ट्राध्यक्ष और मिस्त्र के राष्ट्रपति को भी शुक्रिया कहा है।
7 अक्टूबर 2023 को जब हमास के आतंकियों ने इजरायल पर अभूतपूर्व हमला किया तो एक बारगी दुनिया सन्न रह गयी। अपने सुपर हाईटैक सिक्योरिटी तंत्र प्रसिद्ध इजरायल पर ऐसा हमला दुनिया ने न तो देखा था न सुना था। इस हमले से बौखलाये इजरायल ने कुछ ही घंटों में अपने तौपों का मुंह हमास के नियंत्रण में मौजूद गाजा पर कर दिया और बमों की बौछार कर दी।
30 बच्चों सहित 50 बंधकों की रिहाई, 150 फिलिस्तीनी भी छूटेंगे
राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस डील को संभव बनाने के लिये कतर केशेख तमीत बिन हमद अल-थानी और मिस्त्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल सिसी को धन्यवाद दिया। कतर पिछले समय में भू-राजनीतिक गतिविधियों का बड़ा केन्द्र बन कर उभरा है। आपको बता दें कि अमेरिका हमास के साथ डायरेक्ट डील में शामिल न होकर कतर के माध्यम से इसमें साथ रहा । ऐसा इसलिये है क्योंकि इजरायली हमले में अमेरिकी नागरिक भी मारे गये थे और और अमेरिकी अभी हमास की कैद में हैं।
कतर के पीएम ने रविवार को कहा था कि अस्थाई युद्धविराम के बदले में कुछ बंधकों को मुक्त करने का समझौता ‘‘मामूली’’ व्यावहारिक मुद्दों की वजह से रूका है और इसमें जल्द कामयाबी मिलेगी। वहीं, सोमवार को, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि उनका मानना है कि बंधकों को मुक्त करने का समझौता लगभग है। जब बाइडेन से पूछा गया कि क्या बंधक समझौता निकट है तो उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा विश्वास है।
240 इजरायली बंधक हमास के कब्जे से होंगे आजाद
लेकिन पीएम नेतन्याहू पर 240 इजरायली बंधकों के परिवारों का दबाव भी था। इसलिये वे बातचीत की टेबल पर जाने को राजी हुए। इजरायल के लिये यह मुश्किल फैसला था। जो लोग मारे जा चुके हैं। उनके परिजन इस डील के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि इस बात की क्या गारंटी कि हमास दोबारा हमला नहीं करेगा। इस पीस डील को मुकाम पर पहुंचाने में कतर, मिस्त्र के अलावा तुर्किये ने भी अहम भूमिका निभाई है। तुर्किये कुछ मुस्लिम देशों के सीनियर अधिकारियों को मिलाकर बने ग्रुप में सक्रियता से काम कर रहा था। यह ग्रुप इजरायल हमास में सीजफायर के लिये सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों और दूसरे अहम देशों से बात कर रहा था। इस ग्रुप में तुर्किये, कतर, मिस्त्र, जॉर्डन, नाइजीरिया, सऊदी अरब, इंडोनेशिया,त्र फिलिस्तीन के विदेश मंत्री और प्रतिनिधि शामिल हैं।
