PHE घोटाले में मृत कर्मचारियों को रिकॉर्ड में रखा और निकाला करोड़ों का वेतन और भत्ता, 3 अफसर सहित 1 ठेकेदार गिरफ्तार
ग्वालियर. एक बड़े घोटाले की खबर सामने आयी है। ग्वालियर के पीएचई विभाग में लगभग 16 करोड़ 25 लाख का घोटाला हुआ है। विभाग ने मृत कर्मचारियों को रिकॉर्ड में जिन्दा रखकर करोड़ों की राशि का हेरफेर किया है। इस मामले का खुलासा होने के बाद क्राइम ब्रांच ने 3 पर एफआईआर दर्ज करने के बाद एसआईटी गठित करने के इस मामले की जांच आगे बढ़ी क्राइम ब्रांच ने 3 पीएचई के अधिकारी सहित एक ठेकेदार राहुल वर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया है।
16.25 करोड़ का घोटला हुआ
ग्वालियर के पीएचई विभाग डिवीजन नम्बर 1 में 16 करोड़ 24 लाख रूपये के घोटाले के खुलासा के बाद पूरा महकमा हिला हुआ है। इस मामले में क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर दर्ज की गयी है। पहली पड़ताल में पीएचई विभाग को बाबू हीरालाल और उसका भतीजा कम्प्यूटर ऑपरेटर राहुल वर्मा की भूमिका सामने आयी है। हीरालाल क्राइम ब्रांच के रडार पर है और राहुल पिछले 8 दिनों से पुलिस की रिमांड पर है। पूछताछ में राहुल हर दिन एक नये राज घोटाले के खोल रहा है।
जांच में PHE विभाग नहीं कर रहा सहयोग
गौरतलब है कि ट्रेजरी(कोषालय) और PHE अधिकारियों- कर्मचारियों की सांठगांठ से करोड़ों रुपए का घोटाला स्टेट सर्विलेंस टीम की निगाह में आने के बाद वित्त विभाग ने जांच के आदेश दिए थे । वहीं अधीक्षण यंत्री ग्वालियर मंडल ने भी जांच के लिए 5 सदस्यों की टीम बनाई थी, लेकिन जांच की रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। क्राइम ब्रांच अपनी जांच को आगे बढ़ाने के लिए PHE विभाग को नोटिस भेज चुका है, लेकिन ट्रेजरी और PHE विभाग जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। जिसके चलते दोनों विभाग के अधिकारी-कर्मचारी संदेह के घेरे में हैं ? क्योंकि जांच में खुलासा हो चुका है कि आरोपी बाबू हीरालाल को आहरण के लिए कार्यपालन यंत्री संजय सिंह सोलंकी ने ट्रेजरी में लेनदेन के अधिकार संबंधी आइडी पासवर्ड दे रखा था । वहीं मुख्य अभियंता का कहना है कि “फर्जी बिल लगाकर क्लोरीन खरीदी भी की गई है, जिसका घोटाला 6 से 8 करोड़ रुपए है। पुलिस हमसे जो सहयोग मांगेगी, वह हम सहयोग करने के लिए तैयार है।” आपको बता दें कि अब तक इसका गलत फायदा उठाकर उसने नंबरों में हेरफेर कर अपने रिश्तेदारों के खातों में राशि ट्रांसफर की है।
