देश में वन नेशन वन इलेक्शन में EC को तैयारी में लगेगा डेढ़ वर्ष

अगर लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ होते हैं तो लोगों को दो अलग-अलग ईवीएम में वोट डालना होगा। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar30 लाख इवीएम, 43 लाख बैलेट यूनिट और 32 लाख वीवीपेट की होगी आवश्यकता
नई दिल्ली. एक देश एक चुनाव कराने को लेकर देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराये जाने को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है। गुरूवार 26 अक्टूबर को पीटीआई के हवाले से खबर दी है लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने के लिये चुनाव आयोग को 30 लाख इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (EVM) की जरूरत होगी और साथ ही इसके लिये चुनाव आयोग को तैयारी के लिये डेढ़ वर्ष का समय लगेगा। एक ईवीएम में एक कंट्रोल यूनिट, कम से कम एक बैलेट यूनिट और एक मतदाता सत्यापन योग्य पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) यूनिट शामिल होती है। एक EVM की लाइफ 15 साल होती है।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिये चुनाव आयोग को 30 लाख कंट्रोल यूनिट्स लगभग 43 लाख बैलेट यूनिट्स और लगभग 32 लाख VVPAT  की जरूरत होगी। इसमें उन चीजों को रिजर्व में रखना भी शामिल है जिससे खराबी आने पर यूनिट को बदला जा सके।

वन नेशन वन इलेक्शन के मुद्दे पर 2019 में हुई सर्वदलीय बैठक की तस्वीर। इसकी अध्यक्षता पीएम मोदी ने की थी। उस वक्त सपा, टीआरएस, शिरोमणि अकाली दल जैसी पार्टियों ने इस सोच का समर्थन किया था।
35 लाख वोटिंग यूनिट्स की होगी जरूरत
न्यूज एजेंसी ने यह भी बताया है कि अभी 35 लाख वोटिंग यूनिट्स की कमी है, जिसमें कंट्रोल बैलेट और वीवीपेट यूनिट्स शामिल हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने में कितना खर्च होगा और इसको लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

अपनी EVM लेकर निकलता मतदान कर्मी। किसी भी राज्य में चुनाव कराने में एक बड़ी मशीनरी लगती है। (तस्वीरः AFP)
तब अलग-अलग इवीएम में वोट करना होगा
एक देश एक चुनाव के मद्दे नजर चुनाव आयोग ने कुछ माह पूर्व लॉ कमीशन से बात की थी और साथ ही EVM को रखने के लिये पर्याप्त वेयरहाउसिंग फैसलिटी देने की बात भी की थी। अगर लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं तो लोग को 2 अलग-अलग इवीएम (एक लोकसभा प्रत्याशी के लिये, दूसरी विधानसभा प्रत्याशी के लिये) में वोट डालना होगा। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 12.50 लाख मतदान केन्द्र बनाये गये थे।

वोट करने के बाद अलग-अलग समुदाय के लोगों का कोलाज (तस्वीरः AFP)
इन चीजों की होगी जरूरत
सूत्रों ने बताया है कि डेढ़ वर्ष के तैयारी के समय में इवीएम बनाने वाली ईसीआईएल और बीईएल कंपनियों को पहले सूचना भी देनी होगी और इतने बड़े कार्यक्रम के लिये परेशानी न हो इसलिये सेमी कंडक्टर इंडस्ट्री को डिमांड पूरी करने के लिये इन्फॉर्म करना होगा और साथ ही बड़ी संख्या में तैयार इवीएम के फर्स्ट लेवल चैक () के लिये भी समय लगेगा।

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