ग्वालियर में सिंधिया ने कहा, मेरे पूर्वजों ने ज्ञानवापी मंदिर के कुंए में शिवलिंग का सरंक्षण किया था

ग्वालियर. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ज्ञानवापी मंदिर पर अपनी राय स्पष्ट की है। ऐसे समय में जब ज्ञानवापी मंदिर मस्जिद मामले के फैसले को लेकर सभी की नजर कोर्ट के फैसले टिकी है जब सिंधिया का कहना है कि उस समय में अब मुगल आक्रमणकारी काशी पर हावी थे महारानी आहिल्याबाई होल्कर, महादजी महाराज, बैजाबाई महाराज ने काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी शिवलिंग के संरक्षण की बात कही थी। महारानी बैजाबाई महाराज ने ज्ञानवापी कुंए में शिवलिंग के सौंदर्याीकरण और संरक्षण किया था। काशी की स्थापना में महारानी आहिल्याबाई का महत्वपूर्ण योगदान था। मराठाओं का हिंदू धर्म के साथ जुडाव व संरक्ष छत्रपति शिवाजी महाराज के समय से हमेशा रहा है।
ग्वालियर में 77वां रामलीला मंचन का आयोजन लक्ष्मीबाई समाधि मैदान में हो रहा है। शनिवार रात को रामलीला में ज्योतिरादित्य सिंधिया, पत्नी प्रियदर्शनी, पुत्र महाआर्यमान के साथ पहुंचे। यहां कुछ देर बैठने के बाद उन्होंने रमालीला के मंच से कार्यक्रम मे आए लोगों को संबोधित किया। सिंधिया ने रामलीला के मंच से कहा कि सत्या का रास्ता हमेशा कठिन होता है उसमें संघर्ष बहुत होते है लेकिन जीत सत्य की ही होती है। सिंधिया अपने संबोधन में यहीं नहीं रूके उन्होंने ज्ञानवापी को इतिहास के पन्नों मंे मंदिर बताया। यहां उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ग्वालियर आगमन पर कहा है कि काशी और ग्वालियर का रिश्ता है। यह रिश्ता कैसे है यह उन्होंने बहुत अच्छी तरीके से बताया था। उन्होंने बताया कि काशी के सबसे बडे घाट सिंधिया परिवार के द्वारा स्थापित किए गए। गंगा महल और बालाजी घाट सिंधिया परिवार के द्वारा स्थापित किया गया है लेकिन में ये भी बताना चाहता हूं कि केवल घाट ही नहीं अन्य मंदिर भी और उसके संरक्षण का काम भी सिंधिया राजवंश ने किया है।

 

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