एंटी इनकंबेंसी के डर में 29 विधायकों को घर बैठाया, मंत्रियों के टिकट काटने में दिखी मजबूरी
भोपाल. एमपी में भाजपा की पहली लिस्ट के 65 दिन बाद पांचवीं लिस्ट आई। माना जा रहा था कि यह आखिरी होगी, लेकिन अब दो सीटों के लिए छठी सूची का इंतजार होगा। पांचवीं लिस्ट में एंटी इनकंबेंसी का डर साफ दिखा, लेकिन सिर्फ विधायकों को लेकर। मंत्रियों के मामले में पार्टी पूरी तरह मजबूर नजर आई। कुल जमा तीन मंत्रियों को पार्टी ने चुनावी भागदौड़ की बजाय आराम करने को कहा है।
9 मंत्रियों के नाम रोके थे, सिर्फ 3 के ही टिकट क्यों काटे
चौथी लिस्ट में शिवराज मंत्रिमंडल के 33 में से 24 मंत्रियों को टिकट मिल गया था। 9 मंत्री बचे थे। इन पर संकट साफ नजर आ रहा था। इनका क्या होगा इसी सवाल का जवाब जानने के लिए पांचवीं लिस्ट का इंतजार हो रहा था। 9 में से 4 मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया, बृजेंद्र यादव, सुरेश धाकड़ और ओपीएस भदौरिया महाराज भाजपा के कोटे से हैं। इनमें से सिर्फ ओपीएस भदौरिया ही टिकट की पात्रता परीक्षा में फेल हुए। उन्हें छोड़कर बाकी तीन मंत्रियों को पास कराने में वे सफल रहे, हालांकि इसके लिए उन्हें आखिरी समय तक मेहनत करना पड़ी।
बाकी पांच मंत्रियों में मंत्री गौरीशंकर बिसेन अपनी इच्छा के मुताबिक बेटी मौसम को टिकट दिलाने में सफल रहे। यशोधरा राजे की चुनाव नहीं लड़ने की कथित ‘इच्छा’ का भी पार्टी ने ध्यान रखा। ऊषा ठाकुर की जिस तरह की छवि है वह पार्टी लाइन में एकदम फिट बैठती है, इसलिए उन्हें बेटिकट करने का कोई कारण नहीं था।
उनका टिकट होल्ड करने की एकमात्र वजह सीट की अदला-बदली का विचार था। इसी तरह की वजह इंदर सिंह परमार का टिकट होल्ड करने की थी। उन्हें शुजालपुर की बजाय कालापीपल भेजा जाए या नहीं इसी पर पार्टी को फैसला लेना था। अमरपाटन में रामखेलावन पटेल का कोई विकल्प नहीं मिला।
44% विधायकों की टिकट काटने के पीछे क्या वजह
जिन 92 सीटों पर प्रत्याशी घोषित हुए, उनमें 66 सीटें भाजपा विधायकों की हैं। इनमें से 29 को टिकट नहीं दिया गया। कांग्रेस भाजपा दोनों पार्टियों की अब तक घोषित लिस्ट में यह अब तक का सबसे बड़ा नंबर है। पांचवीं लिस्ट को लेकर इसी तरह के रिजल्ट की संभावना थी। इन विधायकों के टिकट काटने में सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर फीडबैक ही रहा है।
पार्टी ने फीडबैक का कितना ध्यान रखा, इसे इसी तथ्य से समझा जा सकता है कि तीन महिला विधायकों को इस बार मौका नहीं दिया है। दो महिला विधायक तो विदिशा जिले से ही हैं। शमशाबाद से राजश्री सिंह और बासौदा से लीना जैन को इसी वजह से टिकट नहीं मिला।
बुरहानपुर जिले की नेपानगर सीट से कांग्रेस से भाजपा में आईं और उपचुनाव में जीती सुमित्रा कास्डेकर की जगह पूर्व विधायक मंजू दादू को टिकट दिया। पार्टी के फीडबैक में मंजू आगे रही। खंडवा से चार बार के विधायक देवेंद्र वर्मा भी फीडबैक में पिछड़ गए।
