शहर की पहली होली 3,500 कंडो की होली जलाई, शहरभर में 950 जगहों पर हुआ होलिकादहन, 11.32 बजे जलेगी सराफा बाजार की होली
ग्वालियर. गुरूवार की रात होलिका दहन के साथ रंगों के त्योहार होली की शुरूआत हो गयी। शहर में सबसे पहले रात 8.30 बजे सनातन धर्म मंदिर में होलिका दहन किया गया। इसके बाद शहरभर मे ंरंग-गुलाल उड़ने लगा। ग्वालियर की सबसे बड़ी होली सराफाबाजार में जलाई जाती है। इस बार भी यहां 25 हजार कंडों से लगभग 15 फीट ऊंची होलिका बनाई गयी है। 950 जगहों पर होलिका दहन किया गया। ग्वालियर में कुल 950 जगहों पर होलिका दहन हुआ है। इनमें सराफा बाजार, अचलेश्वर महादेव मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, मोटे गणेश मंदिर और करोली माता मंदिर प्रमुख जगह रही है। सराफाबाजार में रात 11.32 बजे शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया जहां हजारों लोग शामिल हुआ।
शुभ मुहूर्त और विशेष योग
पंडित एके बाजपेई के मुताबिक, होलिका दहर का शुभ मुहूर्त 13 मार्च की रात 11.26 बजे से 12.30 बजे तक रहा है। इस बीच शिववास समेत कई शुभ योग बने है। होली की रात भर उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र रहा। जिससे पर्व का महत्व और बढ़ गया।
सनातन धर्म मंें जली कंडों की होली
शहर के प्रमुख सनातन धर्म मंदिर में परंपरा के अनुसार रात 8.30 बजे होलिकादहन किया गया हे। 3,500 कंडों से बनी होली जलाई गयी। इस बीच श्रद्धालुओं ने होलिकादहन की परिक्रमा कर पूजा अर्चना की और एक-दूसरे को गुलाल लगातार शुभकामनायें दी।
होलिका दहन की विधि
पंडित मुकेश कुमार के अनुसार, होलिका दहन से पहले लकड़ियों को कच्चे सूत से तीन या सात बार लपेटना चाहिए। इसके बाद गंगाजल या शुद्ध जल, फूल, कुमकुम, माला, रोली, अक्षत, बताशे, गुड़, साबुत हल्दी, गुलाल और नारियल से पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है।सराफा बाजार में 15 फीट ऊंची होलिका
ग्वालियर शहर की सबसे बड़ी होली सराफा बाजार में बनाई गई। 25 हजार कंडों से तैयार 15 फीट ऊंची होली में होलिका की गोद में प्रह्लाद की प्रतिमा विराजित थी। रात 11:32 बजे शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया, जहां मेले जैसा माहौल रहा।
