MP में बांग्लादेश्यिों के 70 में से 31 फर्जी पासपोर्ट किये निरस्त, 100 से अधिक आरोपी चिन्हित, 5 हिरासत में
ग्वालियर. मध्यप्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी तरीके से भारतीय पासपोर्ट बनवाने के मामले में बड़ी कार्यवाही की है। स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच रिपोर्ट के आधार पास पासपोर्ट विभाग में 70 संदिग्ध पासपोर्ट में 31 अगस्त कर दिये हैं। इनमें 17 पासपोर्ट ग्वालियर जिले के डबरा से जारी हुए थे। इन सभी में डबरा के सिमरिया स्थित बौद्ध बिहार का पता दर्ज कराया गया था।
जांच में पता चला है कि इन पासपोर्ट में एक ही गवाह और एक ही मोबाइल नम्बर का उपयोग किया गया था। इसी के आधार पर ग्वालियर-भोपाल को फर्जी पासपोर्ट रैकेट का प्रमुख केन्द्र माना गया। अब बाकी संदिग्ध पासपोर्ट भी निरस्त कराने की तैयारी है। इस मामले में जांच एजेंसियों ने 100 से अधिक आरोपियों को चिन्हित किया है। लेकिन अभी तक केवल 5 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है।
पहचान-नाम बदलकर बनवाये भारतीय दस्तावेज
एसआईटी की जांच में अहम खुलासा हुआ है कि बांग्लादेशी नागरिकों ने अपनी असली पहचान छिपाकर नाम बदले और भारतीय नागरिक होने के फर्जी दस्तावेज तैयार करवाये। इन्हीं जाली दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट जारी कराये गये। भारतीय पहचान संबंधी दस्तावेज बनवाने के इस नेटवर्क में पंचायत स्तर से लेकर नगरपालिका डबरा तक के लिये कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आयी थी।
बौद्ध विहार के पते का इस्तेमाल कर बनवाए पासपोर्ट
फर्जीवाड़े का नेटवर्क पासपोर्ट बनवाने के लिए बौद्ध मठों के पतों का इस्तेमाल करता था। पुलिस इस मामले में मास्टरमाइंड रियाल चौधरी उर्फ नित्यानंद भिक्षु और उसके तीन बांग्लादेशी साथियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। स्थानीय स्तर पर मदद करने के आरोप में गुलाबराय गौतम, गयाप्रसाद गौतम और भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र के एजेंट नसीम अख्तर को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, मामले में 66 आरोपी मुख्य नेटवर्क से जुड़े हैं, जबकि 34 अन्य की भूमिका भारतीय दस्तावेज तैयार करवाने में सामने आई है। इनमें से कई आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। आशंका है कि कुछ आरोपी देश छोड़कर इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार और चीन जैसे देशों में छिपे हो सकते हैं।STF अधिकारियों का कहना है कि शेष संदिग्ध पासपोर्ट भी जल्द निरस्त कराए जाएंगे। निरस्त पासपोर्ट का इस्तेमाल करने की कोशिश होने पर इमिग्रेशन सिस्टम के जरिए संबंधित व्यक्ति को ट्रैक किया जा सकेगा।
