कलेक्टर फर्जी हस्ताक्षर से 20 बीघा सरकारी जमीन को हड़पने के बनाया फर्जी आदेश

ग्वालियर. . भू-माफियाओं ने कलेक्टर रूचिका चौहान के फर्जी हस्ताक्षर करके 20 बीघा सरकारी जमीन हड़पने की साजिश रची गयी। इस साजिश के तहत फर्जी आदेश भी तैयार कर लिया गया था और उस पर अमल की पूरी प्लानिंग हो चुकी थीं हालांकि पटवारी की समझदारी से धोखाधड़ी का खुलासा हो गया और भू-माफियाओं की साजिश नकामयाब हो गयी।यह मामला ग्वालियर के ग्राम जिरेना का है। 2 दिन की प्रारंभिक जांच के बाद कलेक्टर के रीडर लोकेश गोयल की शिकायत पर विश्वविद्यालय थाने पुलिस ने शनिवार की रात को धोखाधडी का मामला दर्ज किया है।
न्यायालय के नाम, हस्ताक्षर फर्जी से तैयार दस्तावेज
कलेक्टर के रीडर लोकेश गोयल ने थाने में कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर वाला पत्र भी जांच के लिये सौंपा है। जिसमें आदेश के वायरल होने का भी उल्लेख किया गया है। इसी फर्जी आदेश के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। रीडर लोकेश के अनुसार कुछ ठगों ने न्यायालय के नाम और हस्ताक्षर का दुरूपयोग करते हुए फर्जी तरीके से ग्राम जिरेना के सर्वे नम्बर 528ए, 529ए और 111 समेत कुछ 20 बीघा जमीन के फर्जी कागजात बनाये है। उन्होंने बताया है कि इस सरकारी जमीन को हड़ने के लिये प्रताप सिंह, गब्बर सिंह पुत्र मूलचंद माहोर ने कई अन्य लोगों से सांठगांठ कर न्यायालयीन प्रकरण का उल्लेख भी फर्जी आदेश में किया।
आदेश में लिखी गयी भाषा से पटवारी को हुआ शक
कलेक्टर के रीडर लोकेश गोयल ने थाने में कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर वाला पत्र भी जांच के लिये सौंपा है। जिसमें आदेश के वायरल होने का भी उल्लेख किया गया है। इसी फर्जी आदेश के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। रीडर लोकेश के अनुसार कुछ ठगों ने न्यायालय के नाम और हस्ताक्षर का दुरूपयोग करते हुए फर्जी तरीके से ग्राम जिरेना के सर्वे नम्बर 528ए, 529ए और 111 समेत कुल 20 बीघा जमीन के फर्जी दस्तावेज बनाये है। उन्होंने बताया कि इस सरकारी जमीन को हड़पने के लिये प्रतापसिंह, गब्बरसिंह पुत्र मूलचंद माहौर ने कई अन्य लोगों से सांठगांठ कर न्यायालयीन प्रकरण का उल्लेख भी फर्जी आदेश में किया।
प्रारंभिक जांच में पंचायत सचिव का भी नाम आया
यह आदेश प्रतापसिंह और गब्बर सिंह माहौर ग्राम जिरेना के पक्ष में बनाया गया था। इन दोनों का गांव की 20 बीघा जमीन पर कब्जा है। जड़ेरूआ के ही एक व्यक्ति ने उक्त जमीन उनके नाम कराने की बात कहीं थी। पुलिस ने इस व्यक्ति के पिता को पूछताछ के लिये थाने बुलाया था। लेकिन आवश्यक पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गयाग। इस मामले में दंगियापुरा के एक व्यक्ति और पंचायत सचिव का नाम भी प्रारंभिक जांच में सामने आया है। जांच के के बीच प्रताप और गब्बर के बयान दर्ज किये गये थे। इसी बीच यह खुलासा हुआ कि फर्जी आदेश के आधार पर अमल केलिये जब गांव के पटवारी स संपर्क किया गया। उन्हें आदेश की भाषा को लेकर शक हुआ औरइसके बाद ही पटवारी को यह मामला समझ में आ गया और धोखाधड़ी का खुलासा हो गया।

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