ग्वालियर में पदस्थ IAS अधिकारी नाम बिल्डर राजेश शर्मा के यहां छापे में आयकर विभाग का खुलासा में आया
भोपाल. 18 दिसम्बर को 3 बिल्डरों और उनके सहयोगियों के यहां हुई इनकम टैक्स विभाग द्वारा की छापे की कार्यवाही में एक आईएएस अधिकारी के नाम का खुलासा हुआ है। त्रिशूल कंस्ट्रक्शन के राजेश शर्मा और छापे के बाद जद में आये बिल्डरों के मामले में सामने आया है कि इनकी कंपनियों का वार्षिक टर्नओवर 50 करोड़ रूपये से कम शो किया गया है जबकि उन्होंने 500 करोड रूपये से ज्यादा की टैक्स चोरी का मामला है।
इधर, रायपुर के व्यापारी महेन्द्र गोयनका का इन्वॉल्वमेंट का भी खुलासा हुआ है। गोयनका के मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के आईएएस अधिकारियों के साथ संबंधों का भी पता चला है कि इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी के बीच ग्वालियर में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी से महेन्द्र गोयनका के नजदीकी रिश्तों के सबूत मिले हैं। विभाग को शक है कि भोपाल में जमीन की खरीद-फरोख्त में यह अधिकारी-व्यापारी की मदद करता रहा है। इसलिये उसकी भूमिका की भी जांच की जायेगी।
ड्राइवर-कर्मचारियों को भी जारी करेंगे नोटिस
आयकर विभाग की ओर से बिल्डर्स, प्रमोटर्स और कंपनियों के मालिकों और इनके परिजन के साथ अब इनके यहां काम करने वालों को भी नोटिस जारी कर तलब किया जाएगा। सबसे पहले त्रिशूल कंस्ट्रक्शन के राजेश शर्मा के ड्राइवर, अकाउंटेंट और अन्य कर्मचारियों को नोटिस देकर उनसे आय के बारे में जानकारी ली जाएगी। उधर छापे के दौरान चड्डी-बनियान में घर से भागने वाले राजेश शर्मा के डमी कर्मचारी विश्वनाथ साहू के बारे में आयकर विभाग को जानकारी मिल गई है। पता चला है कि उसकी टांग टूटी है और वह अस्पताल में भर्ती है।
दबाव बनाकर लोगों से जमीन बिकवाती थी राजेश की टीम
कारोबारी, ब्यूरोकेट्स, फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों को बेनामी संपत्ति दिलवाने व ब्लैक मनी को ठिकाने लगाने के लिए राजेश शर्मा ने टीम बना रखी थी। इसमें रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारियों के साथ छोटे-बड़े प्रॉपटी डीलर, स्थानीय रसूखदार भी थे। एक टीम तो राजनीतिक, प्रशासनिक दबाव के जरिए लोगों को जमीन बेचने को मजबूर करती थी।
