जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में जीवाजीराव की प्रतिमा स्थापित, अनावरण का है इंतजार
ग्वालियर. सिंधिया राजपरिवार ने जीवाजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिये जमीन दान दी थी उसी परिवार के शासक महाराज जीवाजीराव सिंधिया के नाम पर जीवाजी विश्वविद्यालय का नामकरण किया था विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सामने बने स्टेण्ड पर 12 फीट ऊंची प्रतिमा मुंह बांधकर शनिवार की रात को स्थापित कर दी गयी। अब आदमकद जीवाजीराव की प्रतिमा के अनावरण का इंतजार है। यशोधराराजे सिंधिया की अनुशंसा से बने ईसी मेम्बर प्रदीप शर्मा के प्रयासों से यह प्रतिमा स्थापित हुई है।
आपको बता दें कि यह प्रतिमा मूर्तिकार स्वं. प्रभातराय ने स्वयं ही तैयार की थी। उनके हाथों बनी यह आखिरी मूर्ति बताई जा रही हैं इस प्रतिमा के तौर पर जीवाजी विश्वविद्यालय में मूर्तिकार प्रभात राय की यादें भी हमेशा बनी रहेंगी। ईसी मेम्बर प्रदीप शर्मा ने पहली कार्य परिषद की बैठक में उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में जीवाजीराव की आदमकद 12 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था जिसमें सहमति बन गयी और इसके बाद भी विश्वविद्यालय के कुछ लोगों ने अडं़गा लगाने का भी प्रयास किया था। मगर इसी मेम्बर प्रदीप शर्मा ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर दबाव बनाते रहें।
इसके चलते दो वर्षो के अंतराल में प्रतिमा बनकर तैयार होने के बाद प्रशासनिक भवन के सामने स्थापित भी कर दिया गया है। 1964 में जीवाजी विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद अभी तक 60 वर्ष बीत चुके हैं। तब जाकर विश्वविद्यालय परिसर में प्रतिमा स्थापित हो पाई है।
