तरुण पुष्कर में 8 दिन से खराब था स्वीमिंग पूल का पानी फिल्टर करने वाला प्लांट, कई बच्चे बीमार पड़ गए
ग्वालियर. शहर के वीआईपी स्वीमिंग पूल का पानी पिछले 8 दिन से साफ नहीं हो रहा था क्योंकि पानी का फिल्टर करने वाला प्लांट पिछले एक सप्ताह से खराब था लेकिन इस बीच किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया और हर दिन पानी में बैक्टीरिया रोकने के लिए क्लोरीन डालते रहे और प्रतिदिन करीब 800 लोग इस स्वीमिंग पूल में तैराकी भी सीखते रहे जिसके कारण इसमें गंदगी बढती गई और हालात बिगडते चले गए और जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया।
उल्टी,आंखों में जलन और अन्य कई तरह की परेशानियां शुरू हो गईं
यही कारण रहा कि बच्चे बीमार पड़ गए। जिसमें खुद प्लांट का संधारण करने वाले कर्मचारी बता रहे हैं कि प्लांट में पानी का फिल्टर करने वाला एक टैंक महीनों से खराब है जबकि दूसरा एक सप्ताह से ठीक से काम नहीं कर रहा है,जिसकी भनक भी नहीं लगी। इसी लापरवाही के कारण यह हादसा हो गया। गौरतलब है कि रविवार को संभागायुक्त सुदाम खाड़े के दोनों बेटों के मुंह में उस वक्त पानी चला गया जब वह तैराकी सीख रहे थे। क्लोरीन वाटर बच्चों के शरीर में पहुंचा तो उन्हें उल्टी,आंखों में जलन और अन्य कई तरह की परेशानियां शुरू हो गईं। जिसके चलते उन्हें निजी अस्पताल के आइसीयू में दो दिन रखना पड़ा। इसी तरह से समस्या अन्य बच्चों को भी हुई तो हड़कंप मचा और नगर निगम की लापरवाही उजागर हो गई।
पीला पड़ चुका था पानी
तरुण पुष्कर के कर्मचारी खुद इस बात स्वीकार रहे हैं कि स्वीमिंग पूल का पानी पीला दिखाई देने लगा था। लेकिन यह किसी को समझ नहीं आया कि पानी पीला क्यों पड़ रहा है। तब यह माना गया कि इस वक्त तेज हवाएं चल रही है जिसके कारण बाहर से धूल,पत्ते आदि उसमें गिर जाते हैं। जिसके कारण पानी का रंग बदला हुआ लग रहा है। इसलिए स्वीमिंग पूल में हवा से गिरने वाली गंदगी छलनी से बाहर निकाल दी जाती और लोगों के लिए खोल दिया जाता था। तरुण पुष्कर के स्वीमिंग पूल के कोच के रूप में सहायक खेल अधिकारी अयोध्याशरण शर्मा खुद पदस्थ है।जिन्होंने पानी में घुल रही गंदगी पर ध्यान नहीं दिया जबकि पूल पर 10 लाइफ गार्ड भी तैनात हैं।
