कोरोना जैसी बीमारी अब बच्चों में फैल रही, माता-पिताओं में चिंता की लकीरें
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नई दिल्ली. कोरोना का कहर देखने के बाद अब लोग महामारी के नाम से भी डरने लगे हैं। ऐसे वक्त एक नयी महामारी का खतरा फिर सताने लगा है। इस बीमारी के फैलने की शुरूआत भी कोविड-19 की तरह चीन से ही हो रही है। चीन के कई अस्पतालों में इस रहस्यमयी बीमारी के मरीज देखे गये हैं। तो तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इस पर रिपोर्ट्स आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन () की चिंता भी बढ़ गयी है। यह बीमारी खासतौर पर स्कूली बच्चों में देखी जा रही है।

चीन समेत दुनिया के कई देश अब भी कोरोना से पूरी तरह से नहीं उबर पाये हैं। ऐसे में अब लोगों का ेवह समय याद आने लगा है। जब कोरोना शुरूआती दौर में था। वैसे तो इस महामारी को निमोनिया से मिलता-जुलता बताया जा रहा है लेकिन इसके कई लक्ष्मण निमोनिया से अलग है। इसकी चपेट में आने वाले बच्चों के फेफड़ों में सूजन देखी जा रही है। वहीं, उन्हें तेज बुखार के साथ खांसी, फ्लू और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं को सामना भी करना पड़ रहा है।
ऐसे फैल रही जूनोटिक बीमारियां
एशियाई देश, जैसे चीन, थाइलैंड और इंडोनेशिया में बाजारों में कई जानवरों को जिंदा बेचा जाता है. जगह की कमी के चलते ये सारे पशु एक साथ रख दिए जाते हैं. इससे भी वायरस को फैलने के लिए सही माहौल मिल जाता है. इस तरह की बीमा्रियां जूनोटिक डिसीज की श्रेणी में आती हैं. संक्रमित जानवर की लार, खून, यूरिन, मल या उसके शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क में आने से इंसान इसकी चपेट में आ सकता है.
पशुओं से फैल चुकीं इतनी बीमारियां
कंस्पिरेसी के बावजूद कोविड के मामले में ज्यादातर देश मानते हैं कि ये चमगादड़ों से आई बीमारी है. इसी तरह से सार्स और मर्स भी जानवरों से आए. यहां तक कि एड्स जैसी लाइलाज बीमारी भी संक्रमित चिंपाजी से इंसानों तक पहुंची. यलो फीवर भी साल 1901 में पशुओं से हम तक पहुंचा. इसके बाद से रेबीज, लाइम डिजीज जैसी लगभग 2 सौ बीमारियां हैं, जो संक्रमित पशु-पक्षियों से इंसानों तक आईं.
