वन नेशन वन इलेक्शन 2029 तक संभव हो सकते हैं, सत्ताधारी दल को मिलेगा लाभ, चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस योजना किसी तरह का भेद भाव नहीं-लॉ कमीशन

नई दिल्ली. वन नेशन वन इलेक्शन कमेटी के चेयरमैन और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि इस योजना का लाभ केन्द्र की सत्ताधारी पार्टी को मिलेगा। वह चाहे बीजेपी हो, कांग्रेस हो या दूसरे राजनीतिक दल। योजना देश हित में है। इसमें कोई भेदभाव नहीं है। इसमें सबसे अधिक लाभ आमजनता को होगा, क्योंकि जितना राजस्व बढ़ेगा, वह विकास कार्यो में लगाया जा सकता है।
पूर्व राष्ट्रपति सोमवार को उत्तरप्रदेश के रायबरेली में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस बीच उन्होंने कहा-मैंने सभी रजिस्टर्ड पार्टियों से सुझाव मांगे हैं। कभी न कभी हर राष्ट्रीय पार्टी ने इसका समर्थन भी किया है। कुछ दल असहमत हो सकते हैं। मगर हम सबसे अनुरोध कर रहे हैं कि अपना सहयोग दें। इसमें देश का हित है।
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा है कि वन नेशन वन इलेक्शन पर बहुत सारी समितियों की रिपोर्ट आई है। इनमें संसदीय कमेटी, नीति आयोग और निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट शामिल है। इसमें कहा गया है कि देश में यह व्यवस्था लागू होनी चाहिये।
2029 तक हो सकते है एक साथ चुनाव-लॉ कमीशन
27 सितम्बर को 22वें लॉ कमीशन की बैठक हुई थी। इसमें वन नेशन वन इलेक्शन पर चर्चा हुई थीं विधि आयोग का कहना है कि वह राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल बढ़ाकर या घटाकर सभी विधानसभा चुनावों एक साथ कराने के फॉर्मूले पर काम कर रहा है। अगर, सब ठीक रहा तो सभी राज्यों के चुनाव 2029 के लोकसभा चुनावें के साथ कराये जा सकते हैं। आयोग ने माना था कि वन नेशन वन इलेक्श्ज्ञन के प्रभावी होने से देश का बहुत सारा धन बचेगा।
8 सदस्यों की कमेटी तय करेगी वन नेशन वन इलेक्शन
इसी वर्ष केन्द्र सरकार ने वन नेशन वन इलेक्शन के लिये 8 सदस्यीय एक कमेटी गठित की गयी है। जिसकी अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कर रहे हैं। इसमें गृहमंत्री अमित शाह, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, राज्यसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद और वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एनके सिंह सदस्य है।
इसके मायने क्या हैं
भारत में फिलहाल राज्यों के विधानसभा और देश के लोकसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं। वन नेशन-वन इलेक्शन का मतलब है कि पूरे देश में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हों। यानी वोटर लोकसभा और राज्य के विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय पर या चरणबद्ध तरीके से अपना वोट डालेंगे।
