रतनगढ लक्खी मेला में माता दर्शन करने पहुंचे 15 लाखअधिक भक्तों ने किए दर्शन, कल आ सकते हैं 10 लाख श्रद्धालु
दतिया. रतनगढ़ माता मंदिर पर मंगलवार से विशाल मेला प्रारंभ हो गया है। अभी तक 15 लाख से ज्यादा लोग माता के दर्शन कर चुके हैं। वहीं, कल तक लगभग 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालु माता के दर्शन और करने का अनुमान है। मेला की सुरक्षा को लेकर जिला और पुलिस प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की है। मेल में 2 हजार से अधिक पुलिस अधिकारी कर्मचारी तैनात किये गये है। वहीं, जिले के विभिन्न विभागों से सैकड़ों की संख्या में अधिकारी-कर्मचारी तैनात किये गये हैं।
रतनगढ़ मंदिर पर हर दीपावली की दौज में लगने वाले इस मेले में सदैव से ही लाखों लोगों की भीड़ जुटती है। इसलिये यह मेला शताब्दियों से लक्खी मेले के नाम से ही प्रसिद्ध हैं। भाई -बहन के प्राणोत्सर्ग की स्मृति में लगने वाले इस लक्खी मेले में हर साल 20 से 30 लाख लोग आते हैं। यह अंचल में आस्था का बड़ा कुम्भ है।
सर्पदंश के शिकार भी पहुंचते हैं
इस मेले में देशभर में सर्पदंश या अन्य विषैले जीव और जंतुओं के शिकार हो चुके लोग भी हजारों की संख्या में पहुंचते हैं। मान्यता है कि शर्प दंश के बाद कुंवर बाबा और रतनगढ़ माता का नाम लेकर काटने वाले स्थान पर बंध बांध दिया जाए तो इसका जहर नहीं चढ़ता है। उसे खुलवाने दीवाली की दूज पर यहां आना होता है। माना जाता है कि सर्पदंश का शिकार हुआ व्यक्ति जैसे ही मंदिर क्षेत्र में पहुंचता है, वैसे ही मूर्छित हो जाता है। फिर उसे कुंवर बाबा के सामने पेश किया जाता है। जहां बंध काटा जाता है, फिर वह पूरी तरह स्वस्थ होकर परिक्रमा और माता के दर्शन करता है।
इधर, मंगलवार को माता के दर्शन करने पहुंचे झांसी निवासी नरेश पिता जीतू अहिरवार की सिंध नदी में डूबने से मौत हो गई। नरेश अपने बड़े भाई भारत के साथ माता के दर्शन करने आया था। सिंध नदी में नहाते समय वह गहरे पानी में चला गया। इससे उसकी मौत हो गई।
