दीवाली पर रात 8 से 10 बजे तक चलेंगे पटाखे

ग्वालियर. दीपावली के पर्व पर इस बार भी ग्रीन पटाखे ही चलाने की अनुमति रहेगी। समय रात आठ से रात दस बजे तक रहेगा। इससे पहले न इसके बाद आतिशबाजी कर सकेंगे। बेरियम साल्ट का उपयोग कर निर्मित पटाखे एवं लड़ी का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। 125 डेसीबल से अधिक ध्वनि तीव्रता वाले पटाखों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। क्रिसमस व नववर्ष की पूर्व संख्या पर पटाखे रात 11 बजकर 55 मिनट से 12:30 बजे तक चलाए जा सकेंगे। वहीं साइलेंट जोन भी निर्धारित हैं जिनके 100 मीटर के दायरे में आतिशबाजी नहीं हो सकेगी। हाइकोर्ट व एनजीटी के आदेश के परिपालन में कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए। सभी एसडीएम व सीएसपी को निगरानी के लिए जिम्मा सौंपा गया है।
मप्र शासन गृह विभाग मंत्रालय भोपाल के 2021 के ज्ञापन, सुप्रीम कोर्ट के द्वारा डब्ल्यूपी-सी नंबर 728-2015 श्री अर्जुनगोपाल एवं अन्य विरूद्ध केंद्र सरकार एवं अन्य में जारी आदेश 29 अक्टूबर 2021 एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण भोपाल बेंच के प्रकरण में 19 अक्टूबर 2023 के द्वारा प्रतिबंधित एवं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पटाखों के निर्माण-भंडारण, परिवहन, विक्रय व उपयोग आदि को पूर्णत: प्रतिबंधित किया गया है। इस आदेश में 25 अक्टूबर 2022 को ग्वालियर जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 203 दर्शित है। वर्तमान में ग्वालियर में पिछले दस दिन का एक्यूआइ माडरेट श्रेणी से निम्न श्रेणी का है।
क्या और कैसे होते हैं ग्रीन पटाखे
ग्रीन और पारंपरिक पटाखे, दोनों को जलाने से प्रदूषण फैलता है,दोनों में फर्क इतना ही है कि पारंपरिक पटाखों की तुलना ग्रीन पटाखे 30 फीसदी कम वायु प्रदूषण करते हैं। ग्रीन पटाखे उत्सर्जन को काफी हद तक कम करते हैं और धूल को अवशोषित करते हैं और इसमें बेरियम नाइट्रेट जैसे खतरनाक तत्व नहीं होते हैं। पारंपरिक पटाखों में ज़हरीली धातुओं को कम ख़तरनाक यौगिकों से बदल दिया जाता है। ग्रीन पटाखों को जलाने की अनुमति सिर्फ उन्हीं शहरों में दी गई है, जहां हवा की गुणवत्ता मध्यम या खराब है। सिर्फ एसडब्ल्यूएएस, एसएएफएएल और एसटीएआर इन तीन श्रेणियों में आने वाले पटाखों को ही खरीदें। इन्हें वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) द्वारा विकसित किया गया है।

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