मध्यप्रदेश की सरकार तो किसानों की दुश्मन है-सुरेन्द्रसिंह राजपूत

ग्वालियर. जो साथी कांग्रेस के बुरे समय में साथ है तो अच्छे समय में इन साथियों के साथ रहेगी यह मेरा आपसे वादा है। मैं आप से इस समय किसानों के लिये केन्द्र सरकार द्वारा जारी गयी एमएसपी (मैक्सिमम सर्पोट प्राइज) 2400 सौ रूपये है जबकि मध्यप्रदेश में किसानों की लागत से कम एमएसपी क्यों एमपी सरकार दे रही है यह सरकार तो किसानों की दुश्मन है और पीएम की घोषणा पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान सरकार ताली बजाते हैं। यहां की सरकार एमएसपी से नीचे सरकार खरीदती है और ऊपर किसी को बेच देगी। यह जानकारी प्रदेश प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए दी। इस मौके पर प्रवक्ता आरपी सिंह, राम पांडे और अनुमा आचार्य थी।
‘भावांतर योजना’’ का चौंकानेवाला सच
शिवराज चौहान ने पर्ची देकर श्री जे.पी. नड्डा से 02 सितंबर, 2023 को चित्रकूट में चुनावी घोषणा करवा दी कि मध्य प्रदेश में भावांतर योजना बहुत अच्छी चल रही है।
सच्चाई यह है कि मप्र में शिवराज सरकार ने भावांतर योजना पर ताला लगा दिया है। साल 2023-24 के बजट में भावांतर योजना में ₹1,000 का प्रावधान है। वहीं, साल 2021-22 और साल 2022-23 में एक फूटी कौड़ी भी इस योजना में खर्च नहीं की। जबकि मप्र की कांग्रेस सरकार ने 2019-20 में इस योजना में 422.84 करोड़ रूपये खर्च किये थे, तथा किसानों को लाभ दिया था।
भाजपा सरकार ने किसान कल्याण विभाग को किसान दुर्दशा विभाग बनाया
शिवराज सरकार ने पिछले 6 माह अर्थात अप्रैल से सितम्बर 2023 तक किसान कल्याण विभाग की 23 केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं में से 19 योजनाओं में एक भी पैसा खर्च नहीं किया है। जैसे परंपरागत कृषि विकास योजना, स्वाईल हेल्थ कार्ड, प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना, ट्रैक्टर एवं कृषि उपकरणों पर अनुदान जैसी इत्यादि। म. प्र. के वित्त विभाग का दस्तावेज संलग्नक A1 है।
मध्य प्रदेश में किसान की आय मजदूर की दिहाड़ी से कम
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के कृषि विभाग की संसदीय समिति ने बताया कि मप्र के किसानों की आमदनी साल 2015-16 में ₹9,740 प्रतिमाह से घटकर ₹8,339 प्रतिमाह रह गई है, यानि ₹277 प्रतिदिन, प्रति किसान परिवार। इसका मतलब पाँच सदस्यों के किसान परिवार में आय है ₹55 प्रति सदस्य प्रतिदिन।इसीलिए, शिवराज सरकार के 18 सालों में 20,489 किसानों को आत्महत्या के लिए विवश किया गया।
‘किसान सम्मान निधि’ बनी ‘किसान अपमान विधि
एक तरफ तो मोदी- शिवराज सरकारों ने पिछले 9 वर्षों में खेती की लागत ₹25,000 प्रति हेक्टेयर बढ़ा दी, तो दूसरी ओर उन्हीं की जेब से बढ़े हुए डीज़ल-खाद-बिजली-बीज से पैसे वसूली कर किसान को ₹6,000 प्रति किसान परिवार प्रतिवर्ष देने का स्वांग रचा। पर अब केंद्रीय भाजपा सरकार करोड़ों किसानों का हक छीन धोखा कर रही है। संसद में 08 अगस्त, 2023 को भाजपा सरकार ने आँकड़े पेश किए, जिससे साफ हो गया कि साल 2023-24 में 2,15,01,132 (2.15 करोड़) किसानों को किसान सम्मान निधि से वंचित कर दिया गया है, वहीं म.प्र. में तो यह आँकड़ा और चौंकाने वाला है। म. प्र. के 8,97,208 किसानों को वंचित कर दिया गया है।
कांग्रेस देगी किसानों को स्वामीनाथन आयोग से अधिक बड़ी सौगात
कांग्रेस ने वचन दिया है कि वे मप्र के किसानों को गेहूं का समर्थन मूल्य 2,600 रू. प्रति क्विंटल देंगे तथा धान का समर्थन मूल्य 2,500 रू. प्रति क्विंटल देंगे और इसे भविष्य में 3,000 रू. तक बढ़ा देंगे। किसानों को यह सौगात स्वामीनाथन समिति की सिफारिश से भी अधिक है। कांग्रेस का यह भी वचन है कि मप्र के किसानों के पांच हॉर्स पॉवर तक के सिंचाई के पंप का बिजली बिल पूरी तरह माफ रहेगा।

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