ग्वालियर में नए जिलाध्यक्ष बनने के बाद भाजपा दो गुटों में बटा
ग्वालियर. भारतीय जनता पार्टी में नए अध्यक्ष के मनोनयन को लेकर मची खींचतान के चलते पूरा संगठन दो धड़ों में बंट गया है। इसके पीछे जहां अंचल के 2 कद्दवार नेताओं के अहम पेंच फंसा है वहीं स्थानीय नेताओं के बीच छिड़ी वजूद की जंग के तेज होने से मामला फिलहाल ठंड़ा पड़ने के आसार नजर नहीं आते।
जानकारी के अनुसार इस मामले पर अध्यक्ष का विरोध करने वाले लोग अंचल के एक बड़े नेता के समर्थक बाए जाते है तो दूसरी ओर सियासी वर्चस्व की जंग में लगातार हासिए पर होते जा रहे पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष समर्थन माना जा रहा है। इस बीच नए जिलाध्यक्ष का विरोध करने वाले पार्टी नेताओं द्वारा क्षेत्रीय सांसद विवेक शेजवलकर के साथ भाजपा के प्रदेश महामंत्री सुहास भगत पर निशाना साधे जाने के बाद दूसरा खेमा पार्टी प्लेटफॉर्म सहित सोशल मीडिया पर भी खासा सक्रिय हो गया है।
2 मामलों से मुद्दा गरम
2003 में ग्वालियर पूर्व से श्री शेजवलकर का विधानसभा टिकट कटने पर नागरिक मोर्चा बनाए जाने का ऐलान।
2010 में देवेश शर्मा के पहली बार जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर उनके खुलकर विरोध के पीछे नेताओं की भूमिका।
देवेश शर्मा, निवृतमान जिलाध्यक्ष
पार्टी जिलाध्यक्ष मनोनीत किए जाने के मामले में घोर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया। हसमें निवृत्तमान अध्यक्ष सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों की राय नहीं लिया जाना पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को शिकायत करते हुए हमारा अभियान जारी रहेगा।
