पीएम मोदी ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर 8वीं बार लाल किले पर झंडा फहराने के बाद ओलिंपिक खिलाडि़यों के लिए लाल किले से बजवाई तालियां, कहा भारत को गौरव दिलाने वालों को सम्मान
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75वें स्वतंत्रता दिवस पर आठवीं बार लाल किले पर झंडा फहराने के बाद देश को संबोधित कर रहे हैं। मोदी ने लाल किले से कहा, ’75वें स्वतंत्रता दिवस पर आपको और विश्व में भारत को प्रेम करने वाले और लोकतंत्र को प्रेम करने वाले सभी लोगों को बहुत शुभकामनाएं। आज आजादी के अमृत महोत्सव के पावन पर्व पर देश सभी स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र रक्षा में खुद को आहूत करने और खपाने वाले वीर-वीरांगनाओं को देश नमन कर रहा है। आजादी को जन आंदोलन बनाने वाले बापू हों या सब कुछ न्यौछावर करने वाले नेताजी हों, भगत सिंह, आजाद, बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां, झांसी की लक्ष्मी बाई या चित्तूर की रानी कनम्मा हों, देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू हों, सरदार पटेल हों, दिशा देने वाले अंबेडकर हों.. देश हर व्यक्ति और व्यक्तित्व को याद कर रहा है। देश सभी का ऋणी है।
मोदी ने कहा, ‘इस आयोजन में ओलिंपिक में भारत का नाम रोशन करने वाली युवा पीढ़ी एथलीट्स और हमारे खिलाड़ी मौजूद हैं। मैं देशवासियों को और हिंदुस्तान के कोने-कोने में मौजूद लोगों से कहना चाहता हूं कि हमारे खिलाड़ियों के सम्मान में कुछ पल तालियां बजाकर उनका सम्मान करें।
भारत के खेलों का सम्मान, भारत की युवा पीढ़ी का सम्मान, भारत को गौरव दिलाने वाले युवाओं का सम्मान, करोड़ों देशवासी आज तालियों की गड़गड़ाहट के साथ देश के जवानों का, युवा पीढ़ी का सम्मान कर रहे हैं। एथलीट्स पर विशेष तौर पर हम ये गर्व कर सकते हैं कि उन्होंने दिल ही नहीं जीता, उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को भारत की युवा पीढ़ी को प्रेरित करने का बहुत बड़ा काम किया है।’
हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाएंगे
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम आजादी का जश्न मनाते हैं, लेकिन बंटवारे का दर्द आज भी हिंदुस्तान के सीने को छलनी करता है। ये पिछली शताब्दी की सबसे बड़ी त्रासदी में से एक है। आजादी के बाद इन लोगों को बहुत ही जल्द भुला दिया गया। कल ही भारत ने एक भावुक निर्णय लिया है। अब से हर वर्ष 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में याद किया जाएगा।
जो लोग विभाजन के समय अमानवीय हालात से गुजरे, अत्याचार सहे, सम्मान के साथ अंतिम संस्कार नसीब नहीं हुआ। उनका हमारी स्मृतियों में जीवित रहना जरूरी है। इस दिवस का तय होना, ऐसे लोगों को हर भारतवासी की तरफ से आदर पूर्वक श्रद्धांजलि है। इससे पहले के सालों में मोदी के अब तक के सारे संबोधन एक घंटे से ज्यादा के ही रहे हैं। 2014 से 2020 तक के 7 साल में मोदी 2017 में सबसे कम 56 मिनट, तो इससे एक साल पहले 2016 में सबसे लंबा 96 मिनट का संबोधन दे चुके हैं।
