फायरबिग्रेड हादसे में जान गंवाने तीनों कर्मचारियों का परिवार में इकलौता सहारा थे, बच्चे बोले-पापा कब आयेंगे तो मां और पत्नी को यकीन नहीं हो रहा

ग्वालियर. शनिवार की सुबह दर्दनाक हादसे में 3 नगरनिगम कर्मचारियों की मौत हो गयी। कुलदीपसिंह दण्डोतिया ने हादसे के कुछ देर पहले ही फेसबुक पर परिवार का फोटो शेयर किया था। कुलदीप घर पर इकलौता सहारा था और उसके 2 और 5 वर्ष के 2 बेटे हैं। घर में मातम पसरा है। मासूम बच्चे बार-बार यही पूछ रहे हैं कि पापा कब आयेंगे। दूसरे कर्मचारी प्रदीप राजौरिया का सोशल मीडिया पर लास्ट अपडेट थाि। जिन्दगी की पिच पर ध्यान से खेलना, सबसे नजदीक खड़े लोग ही स्टम्पिंग करते हैं पर वह नहीं जानता था कि वह जिन्दगी की पिच पर इस तरह से आउट होगा। पत्नी और मां को विश्वास नहीं हो रहा है कि प्रदीप अब नहीं रहा । पत्नी बार-बा रनाम लेकर पुकार रही है।

कुलदीप के बेटे देवांश और तेजस।
बच्चों जल्द आऊंगा, जल्द कहीं घुमाने ले जाऊंगा
मुरैना निवासी कुलदीप सिंह दण्डौतिया 17 वर्ष से नगरनिगम में अस्थाई कर्मचारी थे। परिवार में मा-पिता, भाई के अलावा पत्नी पिंकी दण्डौतियां, बच्चे देवांश 5, तेजस 2, हैं। कुलदीप मुरैना से अपडाउन करता था। बच्चों से बाहर घुमाने ले जाने का वादा किया था। जब मौत की खबर घर पहुंची तो मोहल्ले में मातम पसर गया।

प्रदीप ने मदर्स डे पर मां के साथ सेल्फी सोशल मीडिया पर शेयर की थी।
पत्नी को नहीं प्रदी की मौत की खबर
घटना में जान गंवाने वाले प्रदीप राजौरिया 10 वर्ष नगरनिगम में अस्थाई कर्मचारी थे। परिवार में मां, पत्नी हिमांशी, बेटी वाणी 4, और बेटा यांश 4 माह, हैं। सभी की जिम्मेदारी प्रदीप पर थी। पहले वह दानाओली में रहते थे, लेकिन कुछ वर्ष पहले ही वीरपुर बांध एरिया में शिफ्ट हो गये। हादसे की बाद पत्नी हिमांशी को मौत की जानकारी नहीं दी। उसे यही बताया गया कि प्रदीप घायल हो गया है। दोपहर जब पति का शव दरवाजे पर पहुंचा तो हिमांशी को सच्चाई का पता लगा कि वह पति का शव देखकर बेसुध हो गयी।

विनोद शर्मा का सपना था कि उसके बच्चे बड़े होकर अफसर बनें।

बच्चों को अफसर बनाना चाहते थे विनोद
हादसे में तीसरी मौत नगर निगम की बिल्डिंग के चौकीदार विनोद कुमार शर्मा की हुई है। विनोद नगर निगम में नियमित कर्मचारी थे। विनोद के तीन बच्चे विकास (20), आकाश (18) और दामिनी (17) हैं। तीनों बच्चों को अफसर बनाना चाहते थे। सभी को अच्छी पढ़ाई करा रहे था। बच्चे भी पिता का सपना पूरा करने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे थे, लेकिन यह कोई नहीं जानता था कि विनोद यह सपना पूरा होने से पहले ही दुनिया छोड़कर चले जाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *