मप्र में 8 माह में 7 हजार युवतियां लापता हुई, सीएम शिवराज ने डीजीपी को आवश्यक निर्देश दिए
भोपाल. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डीजीपी विवेक जौहरी को निर्देश दिए हैं कि लापता युवतियों व बच्चियों को तलाश करने का अभियान तेज करें, उन्होंने कहा कि घर से बाहर अन्य जिले में रहकर काम करने वाली महिलाओं का रिकॉर्ड रखने के लिए सिस्टम बनाएं जिसमें वे शिकायत कर सकें तभी उनके साथ होने वाले अपराधों को रोक पाएंगे। सीएम शिवराज ने आगे कहा कि ऐसी व्यवस्था हो कार्य के लिए जिले से बाहर जाने पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो, गायब बच्चों में बेटों की तुलना में बेटियों की संख्या दुगुनी होने से यह स्पष्ट संकेत है कि उनका गायब होना सामान्य नहीं है।
3 हजार बेटियों का अभी तक सुराग नहीं मिला
सीएम शिवराज सिंह न युवतियों के लापता होने को गंभीरता से लिया है यही वजह है कि उन्होंने मंत्रालय में इसको लेकर उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। दरअसल मप्र में पिछले साल अप्रैल से दिसंबर के बीच 7 हजार युवतियों के लापता होने की एफआईआर उनके परिजनों ने दर्ज कराई है। पुलिस इसमें से करीब 4 हजार युवतियों को बरामद कर चुकी है जबकि 3 हजार का अभी तक सुराग नहीं मिला है। सीएम ने कहा कि बेटियों के गायब होने के मामले में गंभीर कार्यवाही की आवश्यकता है इसलिए यह विशेष बैठक बुलाई गई है। गायब बालिकाओं की संख्या भी छोटी नहीं है इतनी बड़ी संख्या में ये होना चिंता का विषय है।
बैठक में डीजीपी जौहरी ने बालिकाओं और युवतियों के गायब होने के पीछ प्रमुख कारण बताए। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र के थानों में दर्ज मामलों में अधिकांश में बिना बताये घर से जाना, नाराज होकर भागना या फिर बिना बताए, प्रेमी के साथ भागने के तथ्य सामने आए है जबकि ग्रामीण क्षेत्र से मजदूरी के नाम पर पलायन होता है। इसमें श्रम विभाग की कार्यवाही आवश्यक होगी। इस पर सीएम ने कहा कि यह भी देखें कि कांट्रेक्टर उन्हें कहां और किस कार्य से ले जाते है इसका संपूर्ण रिकॉर्ड रखा जाए। बैठक में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा भी मौजूद रहे।
पीएचक्यू की नई गाइडलाइन
महिलाओं के खिलाफ घटित होने वाले यौन अपराधों के प्रकरणों में दो महीने की अवधि में विवेचना पूर्ण करने का वैधानिक प्रावधान है।
महिलाओं के खिलाफ होने वाले जिन अपराधों की विवेचना के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित नहीं है उनकी विवेचना भी 3 महीने में पूरी करनी होगी।
न्यायालय के निर्णय, निर्देश, पुलिस मुख्यालय के आदेश और निर्देश के पालन में विवेचना तीन महीने में पूर्ण करनी होगी।
महिलाओं के अपराधों की जांच 3 महीने से आगे जारी रखने के लिए विवेचक थाना प्रभारी को पहले प्रत्येक प्रकरण में जिला पुलिस अधीक्षक से अलग-अलग आदेश प्राप्त करना होगा।
