चुनाव आयोग के फॉर्म-6 दावे पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: CJI बोले- मंजूरी नहीं दी, कानून का उल्लंघन हुआ तो फैसला पलट देंगे

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की याचिका पर सुनवाई की। उन पर SIR से जुड़े करीब 14 फैसले दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लेने का आरोप है। अदालत ने उन्हें निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से तो इनकार किया, लेकिन चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि अगर फैसले बिना सहमति के लिए पाए गए, तो उन्हें वापस लिया जा सकता है। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा- Form-6 में किसी संशोधन को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। इसके कुछ घंटे बाद चुनाव आयोग ने कहा कि 24 जून, 2025 के बिहार SIR आदेश के दौरान फॉर्म 6 के साथ एक घोषणा जोड़ी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई के अपने आदेश में इसे सही ठहराया था। 9 दिन पहले भी चुनाव आयोग ने प्रेस नोट में कहा था कि SIR के लिए Form-6 के साथ लगाए गए डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिली है।

CEC ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में 20 राज्यों/UTs में SIR पूरा, करीब 13.3 करोड़ नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटे हैं। - Dainik Bhaskar
सुप्रीम कोर्ट की 4 बड़ी बातें
अखबार की खबर के आधार पर आदेश नहीं दे सकते: CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोई खबर 100% सही, आंशिक रूप से सही या गलत हो सकती है। इसलिए सिर्फ मीडिया रिपोर्ट के आधार पर CEC को सस्पेंड करने का अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। पहले चुनाव आयोग का जवाब और रिकॉर्ड देखना होगा।
फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाने चाहिए। यानी तीन सदस्यीय आयोग में किसी एक सदस्य का अकेले फैसला पूरे आयोग का फैसला नहीं माना जा सकता।
अभी यह नहीं मान सकते कि सारे फैसले CEC ने अकेले लिए: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले रिकॉर्ड देखना होगा। सिर्फ आरोप के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि सभी फैसले CEC ने अकेले लिए थे।
रिकॉर्ड से एकतरफा फैसला साबित हुआ तो कार्रवाई संभव: सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर रिकॉर्ड से पता चलता है कि कोई फैसला जरूरी प्रक्रिया के बिना लिया गया था, तो उस पर रोक लगाने पर विचार किया जा सकता है।

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