कथक साधना महोत्सव में छात्राओं ने दीं मनमोहक एकल प्रस्तुतियाँ
ग्वालियर – राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कथक नृत्य विभाग द्वारा नियमित रूप से आयोजित “कथक साधना महोत्सव” के अंतर्गत गुरुवार को विभाग के कक्ष क्रमांक–13 में दो छात्राओं ने शुद्ध शास्त्रीय कथक की प्रभावशाली एकल प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्रबुद्धे एवं कुलसचिव डॉ. आशुतोष खरे के संरक्षण तथा कथक नृत्य विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अंजना झा के निर्देशन में आयोजित किया गया।
प्रथम प्रस्तुति एम.ए. प्रथम वर्ष की छात्रा हर्षिता राय ने दी। उन्होंने गुरु वंदना से प्रस्तुति का शुभारंभ किया। इसके पश्चात तीनताल में ठाठ, उठान, आमद, तोड़े, मध्यलय, कवित्त, तिहाई एवं परण प्रस्तुत कर कथक की शास्त्रीय बारीकियों का सुंदर प्रदर्शन किया। प्रस्तुति का समापन उन्होंने भावपूर्ण ठुमरी “कान्हा गिरधारी मेरो मारग रोकत” से किया।
द्वितीय प्रस्तुति बी.पी.ए. तृतीय वर्ष की छात्रा नेहा जेरोनिया ने दी। उन्होंने चौताल में गणेश परण, क्रमलय, उठान, आमद, परमेलु, तोड़े, टुकड़े एवं तिहाई प्रस्तुत की। इसके उपरांत “ॐ जयंती मंगला काली…” पर आधारित दुर्गा स्तुति के माध्यम से देवी के शक्तिस्वरूप को भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम में तबले पर हितेश मिश्रा तथा सारंगी पर अब्दुल हमीद खान ने प्रभावशाली संगत प्रदान की। संगीत विभाग के डॉ. विकास विपट भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर कथक विभाग सहित विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के विद्यार्थी, शिक्षक, शोधार्थी एवं कलाप्रेमी भी उपस्थित थे।
दोनों छात्राओं ने लय, ताल, पद-संचालन, हस्तक एवं भाव-अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। डॉ. अंजना झा ने बताया कि कथक साधना महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों को नियमित मंच प्रदान करना, उनमें एकल प्रस्तुति का आत्मविश्वास विकसित करना तथा कथक की शुद्ध शास्त्रीय परंपरा का संरक्षण एवं संवर्धन करना है। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. अंजना झा ने प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से जुड़े सभी दर्शकों, कलाप्रेमियों, शिक्षकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
