ग्वालियर की खराब सड़को के लिये हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव, कलेक्टर और निगमायुक्त को नोटिस जारी, 4 सप्ताह में मांगा जवाब
ग्वालियर. जर्जर और खस्ताहाल सड़कों को लेकर दायर की गयी जनहित याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सुनवाई की। अदालत ने शहर की बदहाल सड़कों पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि वास्तव में हालत चिंताजनक है। हाईकोर्ट ने नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव, ग्वालियर कलेक्टर और नगरतिनगम आयुक्त को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
शहर की सड़कों की दुर्दशा ने अदालत के सामने रखा
ग्वालियर की अधिकांश सड़कें इस कदर जर्जर है। उन पर वाहन चलाना तो दूर पैदल चलाना भी मुमकिन नहीं है। इसी समस्या को लेकर याचिकाकर्त्ता कैलाशचंद्र अग्रवाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। मंगलवार को इस पर सुनवाई के दौरान उनकी ओर से अधिवक्ता अवधेशसिंह तोमर ने तर्क दिया कि ग्वालियर ऐतिहासिक महत्व का शहर है। जहां अनेक धरोहरें है। यहां देश-’विदेश से पर्यटक आते हैं। लेकिन जर्जरी सड़कों की वजह से शहर की छवि खराब हो रही है। याचिकाकर्त्ता ने माधवनगर और चेतकरपुरी रोड का उदाहरण देते हुए बताया कि यहां डिजास्टर मैनेजमेंट फण्ड के तहत नाले को स्वर्णरेखा से जोड़ा गया था। इसके लिये खुदाई की गयी। पाइप लाइन बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है। लेकिन सड़क को अभी तक दुरूस्त नहीं किया गया। दिन भर उड़ती धूल और गड्ढों के कारण आमजन को परेशानी झेलनी पड़ रही है। दुर्घटनाओं की संभावना भी बनी हुई है।
हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, मांगे फोटो प्रमाण
हाईकोर्ट की युगलपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अफसरों की लापरवाही पर नाराजगी जाहिर की और याचिकाकर्ता को सड़कों की वास्तविक स्थिति को दर्शाने वाले फोटो भी पेश करने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि शहर की खराब सड़कों को लेकर संपूर्ण रिपोर्ट पेश की जाए।
13 मई को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव, ग्वालियर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 13 मई को संभावित है।
