जेयू: पुस्तकालय को नई तकनीकी के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ा गया है: डॉ.राजकुमार आचार्य
वर्तमान में लाइब्रेरी डाटा सेंटर हो गए हैं: प्रो.आलोक शर्मा
पुस्तकालय किसी भी संस्थान की आत्मा होती है: प्रो. के रत्नम
बोध होने पर ही शोध होगा: पंकज नाफडे़
ग्वालियर। ज्ञान प्रणाली और पुस्तकालय में नई प्रौद्योगिकियां आधुनिक युग में शिक्षा और सूचना के प्रसार को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ये प्रौद्योगिकियां न केवल ज्ञान के संग्रहण, प्रबंधन और वितरण को आसान बनाती हैं, बल्कि उपयोगकर्ताओं के अनुभव को भी समृद्ध करती हैं।एआई का उपयोग पुस्तकालयों में खोज प्रक्रिया को तेज और सटीक बनाने के लिए किया जा रहा है। एआई संचालित सर्च इंजन उपयोगकर्ताओं के प्रश्नों का तुरंत जवाब देते हैं और उनकी रुचि के अनुसार सामग्री सुझाते हैं।लाइब्रेरी का परिदृश्य बिल्कुल बदल गया है। नई तकनीकी ने पुस्तकालय को बिल्कुल ही बदल दिया है। हम किसी भी भाषा में पढ़ाई कर सकते हैं।
लाइब्रेरी डाटा सेंटर बन गए हैं।यह बात सोमवार को जेयू के गालव सभागार में आयोजित ज्ञान प्रणाली और पुस्तकालय में नई प्रौद्योगिकियां विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में आईआईटीटी एम के निदेशक डॉ. आलोक शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि कही। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में सहायक संचालक उच्च शिक्षा विभाग प्रो.कुमार रत्नम व शिक्षाविद पंकज नावडे उपस्थित रहे।अध्यक्षता जेयू के कुलगुरू प्रो. राजकुमार आचार्य की।प्रो.जेएन गौतम के स्वागत भाषण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों को शाल श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इसी क्रम में स्मारिका का विमोचन किया गया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो.कुमार रत्नम ने कहा कि रंगनाथ जी ने पुस्तकालय को विकसित ही नहीं किया बल्कि उसे व्यवस्थित स्वरूप दिया। वर्तमान में पुस्तकालय को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की आवश्यकता है। पुस्तकालय किसी भी संस्था की आत्मा होती है। भारत की हमेशा किताबों से पढ़ने की परंपरा रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जेयू के कुलगुरू प्रो. राजकुमार आचार्य ने कहा कि व्यक्ति कहता है कि हम किताबें पढ़ते हैं बल्कि किताबें में व्यक्ति को पड़ती हैं। पुस्तकालय को नई तकनीकी के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ा गया है। सारे क्षेत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रभाव है। ज्ञान के प्रकाश को राष्ट्र और समाज के हित में लगाना होगा इसमें लाइब्रेरी की महत्ता बढ़ जाती है।
इस अवसर पर प्रो.एसएन मोहापात्रा, प्रो.एसके श्रीवास्तव, प्रो.एसके सिंह, डॉ. स्वर्णा परमार, प्रो.संजय गुप्ता,प्रो. आईके पात्रो, प्रो. एमके गुप्ता, प्रो.शांतिदेव सिसौदिया,प्रो.संजय कुलश्रेष्ठ,डॉ. शैलेन्द्र पटेरिया,डॉ.नवनीत गरूड़,प्रो. गणेश दुबे, डॉ.सत्येन्द्र सिंह सिकरवार,डॉ.पीके जैन, डॉ.सपन पटेल,प्रो.विवेक बापट, अमित सिसौदिया,शकील कुरैशी, संजय जादौन, सहित शोधार्थी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
