तत्कालीन परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने की थी सौरभ की सिफारिश
ग्वालियर. काली कमाई के कुबेर परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को परिवहन विभाग में आरक्षक बनाने की सिफारिश खुद तत्कालीन परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने की थी। तत्कालीन परिवहन आयुक्त ने नोटशीट पर लिखा भी था कि अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण में सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाना चाहिए। सौरभ शर्मा की नियुक्ति का आदेश जारी किया जाए। यह टीप तत्कालीन परिवहन आयुक्त शैलेंद्र श्रीवास्तव ने तत्कालीन अप आयुक्त परिवहन आरके जैन की आपत्ति के बाद भी लिखी थी। आरके जैन ने नियमों का हवाला देक तृतीय वर्ग श्रेणी में नियुक्ति को लेकर नियम कायदों की जानकारी मंगवाने के लिए लिखा था। परिवहन विभाग इस असमंजस में भी पड गया था कि तृतीय श्रेणी वर्ग में भर्ती की जाए या मंत्रीजी के सिफारिशी पत्र का पालन किया जाए। इस पूरे मामले में मंत्रीजी का पत्र भारी रहा और सौरभ क नियुक्ति हो गई।
सौरभ शर्मा के भाई और मां पर झूठा शपथ-पत्र देने का आरोप
सौरभ शर्मा मामले में साथी चार आरक्षकों के खिलाफ समन जारी हो गया है। साथ ही सौरभ शर्मा की नियुक्ति के मामले में सौरभ शर्मा ने खुद व मां के अलावा भाई का भी शपथ पत्र दिया था जो छत्तीसगढ़ में ईओडब्ल्यू में पदस्थ है। इस शपथ पत्र में सौरभ के भाई सचिन शर्मा ने लिखा है कि वह निजी नौकरी करता है। बता दें कि परिवहन विभाग के पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा के मामले ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। सौरभ शर्मा के यहां मिली काली कमाई की लोकायुक्त-आयकर विभाग से लेकर ईडी तक जांच कर रही है। वर्तमान में सौरभ शर्मा कहां है यह किसी को नहीं पता है। सौरभ की मां व वकील ने सौरभ को जान का खतरा भी बताया है। इसी पूरे मामले में सरकार की इतनी किरकिरी हो गई कि प्रदेश के परिवहन आयुक्त डीपी गुप्ता को हटाना पड़ गया। उनके स्थान पर एडीजी विवेक शर्मा को भेजा गया है जिन्होने शनिवार को चार्ज संभाल लिया।
