‘‘मस्जिदों का ताज’’ एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद को कहते हैं

भोपाल. रमजान का महीना अब पूरा होने को है प्रतिवर्ष खासतौर पर रमजान के दिनों में मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों में इबादत करते है। हालांकि इस बार कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन की वजह से देशभर की सभी मस्जिदों सहित धर्मस्थलों को बन्द कर दिया गया है। ताकि भीड़भाड़ न लगे और लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहें। वैसे तो रमजान के दिनों में शहर की सभी मस्जिदों में भीड़ दिखाई देती है। लेकिन, शहर की मस्जिदों का ताज कही जाने वाली ताज उल मस्जिद में इबादत गुजारों की अधिक भीड़ उमड़ती है। जो इसबार देखने को नहीं मिल रही हैं तो आइये जानते हैं ताज उल मस्जिद के बारें में खास बातें।
वैसे तो दिल्ली की जामा मस्जिद को भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में बताया जाता है लेकिन शोध के अनुसार भोपाल की बेगम सुल्तान शाहजहां द्वारा बनाई गयी ताजुल मस्जिद को भारत की सबसे बड़ी मस्जिद में शुमार है। इसे सिर्फ भारत की ही नहीं बल्कि एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद माना गया है।
शाहजहां बेगम की मौत के बाद बेटी ने बनवाई मस्जिद
बहादुर शाह ज़फर की हुकुमत में भोपाल रियासत की नवाब शाहजहां बेगम ने इस खूबसूरत मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू करवाया था। हालांकि, मस्जिद की तामीर ;निर्माणद्ध बीच ही शाहजहां बेगम की मृत्यु के बाद उनकी बेटी ने इस मस्जिद को बनाने की जिम्मेदारी ली। शहर की अगली नवाब सुल्तान जहां बेगम ने इसका निर्माण कार्य जारी रखा। पैसों की कमी के कारण बाद में इसका निर्माणकार्य कुछ समय के लिए रुकवाना पड़ा। आखिरकार वो भी इस मस्जिद को मुकम्मल नहीं करवा सकीं थीं। हालांकिए निर्माण में इस्तेमाल किये जाने वाला पत्थर उन्होंने कारीगरों से पहले ही तरशवा लिया था, ताकि भविष्य में जो कोई भी इस मस्जिद की तामीर पूरी करवाएए। उसे इसमें कोई अन्य पत्थर नहीं लगवाना पड़े। ताकि उससे मस्जिद की खूबसूर्ती पर कोई फर्क पड़े। आखिरकार, सुल्तान जहां बेगम की मृत्यु के बाद इस मस्जिद को शहर की बुजुर्ग हस्ती मोलाना इमरान खां साहब ने पूरा करवाया।

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