मप्र हाईकोर्ट के जज बने महाधिवक्ता कौरव, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद राष्ट्रपति भवन से मिली मंजूरी

भोपाल. जबलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता पुरूषेंद्र कौरव मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस नियुक्ति किए गए है, उनके नाम की अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 1 सितंबर को की थी। राष्ट्रपति ने  इस अनुशंसा पर मंजूरी की मुहर लगा दी। कौरव वर्तमान में मप्र सरकार के महाधिवक्ता थे। 2009 में कौरव सबसे कम 33 वर्ष की उम्र में उप महाधिवक्ता फिर अतिरिक्त महाधिवक्ता और जून 2017 में पहली बार महाधिवक्ता बनाए गए। उस समय शिवराज सिंह की सरकार ने तत्कालीन एजी रवीश अग्रवाल का इस्तीफा मंजूर करने के बाद कौरव को दिल्ली से वापस बुलाकर यह जिम्मा सौंपा था। वे शुक्रवार सुबह 10.30 बजे पदभार ग्रहण करेंगे। खास बात यह है कि वह सबसे कम उम्र के हाईकोर्ट न्यायाधीश है।

कांग्रेस की सत्ता जाते ही फिर बनाए गए महाधिवक्ता
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार में वापसी के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया था। प्रदेश में 15 महीने बाद फिर सत्ता बदली तो एक बार फिर पुरुषेंद्र कौरव एमपी के 18वें महाधिवक्ता बने। 45 वर्षीय पुरुषेंद्र कौरव के नाम को राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी मिल गई तो वे महाधिवक्ता के पद से सीधे हाईकोर्ट में जज बनने वाले वे पहले व्यक्ति होंगे। महाधिवक्ता पद संभाल चुके कई लोग हाईकोर्ट में जज बने, लेकिन पद संभालते हुए ऐसा पहली बार होगा।

2001 में किया था लॉ, 2006 से स्वतंत्र वकालत
वर्ष 2001 में एनईएस लॉ कॉलेज जबलपुर से कानून की पढ़ाई करने के बाद कौरव ने अपने मामा वीरेन्द्र चौधरी के साथ जबलपुर से वकालत शुरू की। उन्होंने वर्ष 2006 में स्वतंत्र वकालत शुरू की और 15 साल में ही इस मुकाम तक पहुंच गए कि अब उनके नाम को सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस के तौर पर भेजा गया था।

 

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