मप्र में नई पहल का पहला दिन- एडीजी राजाबाबू सिंह ने अपने रेंज पुलिस अधिकारियों के साथ की जूम मीटिंग
ग्वालियर. सभी ग्वालियर रेंज के पुलिस अधिकारियों को एक साथ बैठाया गया और सभी ने अधिकारियों ने एक दूसरे की बातें सुनी और अपने सुझाव दिये और जिस पुलिस अधिकारी ने ग्वालियर रेंज में अच्छा काम किया है उसने सभी अधिकारियों के बीच शेयर किये यह मौका था सुबह 8.30 बजे एडीजी राजाबाबू सिंह ने अपने रेंज के डीआईजी एके पांडे, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोक नगर के पुलिस अधीक्षकों के साथ साथ एएसपी, सीएसपी और आरआई के साथ सभी से ग्वालियर रेंज के पुलिस अधिकारियों से कानून व्यवस्था और कोरोना वायरस के संक्रमण की जानकारी ली। इसमें अभी फौरंसिक और डीपीओ को आगे जोड़ा जायेगा।
जूम मीटिंग के बहुत फायदे हैं
जब से कोरोना की महामारी शुरू हुई है तब से नये नये तरीके से जो हमारे इन्फ्रास्ट्रक्चर हैं उनका प्रबंधन लॉजिस्टक्स तैयार करना और मैन पावर का प्रबंधन शामिल है। हर पुलिस अधीक्षक और आरआई अपने स्तर पर नये इनोवेशन कर रहा है जैसे कि आरआर ग्वालियर ने सुपर स्टोर खोला, बल्क में मास्क सिलवाये लाईन में फिर चाय नाश्ता गर्म पानी के लिये चलित वाहन बनवाया दूसरे जिलों ने भी किया तो यह सारे नये इजाद है नये इनोवेशन्स नवाचार है एक अगर कहीं पे अच्छा दूसरा जिला कॉपी करें इसके लिये भी आज से मैंने जूम मीटिंग शुरू की है फायदा मिलता सभी लोग लिस्निंग वॉच में रहते हैं और एक जिला अगर कोई बात बोलता है उसे लगता है कॉपी करने योग्य है तत्काल दूसरा भी कॉपी कर लेता है तो यह अच्छे एक्सपेरीमेंट हैं नवाचार हैं उसके दूसरे जिलों को देने का अच्छा तरीका है फिर कम टाइम में सभी एक साथ बात हो जाती है और बहुत सारे पिन पॉइंट पूरा रेंज है एक कोहेजी ग्रुप की तरह रहता है और ऐसा नहीं लगता कोई अपने अलग रास्ते जा रहा है सभी एक साथ सब को यह रहता जैसे मान लीजिये एक किसी एएसपी रैंक के ऑफीसर को दूसरे जिले के एएसपी से बात करना है या आरआई को दूसरे जिले के आरआई से बात करना है तो यही टाइम होता है जूम मीटिंग का सुबह 8.30 से 9.30 बजे जिसमें वह अपनी बात कह सकता हैं वह बात दूसरे लोगों तक पहुंच सकती है दूसरे एसपी तक डीआईजी तक या मेरे तक जो यह सभी फायदे हैं जूम मीटिंग के ।
