GE ने सितम्बर में भेजे 4 इंजन से मिली फायटर जेट तेजस को मिली रफ्तार


नई दिल्ली. अमेरिकी कम्पनी जीई एयरोस्पेस ने सितम्बर 2026 मेें 4 एफ404-आईएन20 इंजन भारत भेज दिये है। कम्पनी के प्रवक्ता ने कहा है कि हम भारत के स्वदेशी लड़ाकू फायटर जेट तेजस को शक्ति देने वाले इंजनों की आपूर्ति पर ध्यान केन्द्रित हुए है। हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और भारतीय वायुसेना के साथ साझेदारी पर हमें गर्व है। खबर स्वदेशी तेजस एमके1ए कार्यक्रम के लिये महत्वपूर्ण है। क्योंकि इंजनों की कमी लम्बे समय से उत्पादन में सबसे बड़ी रूकावट बनी हुई है।
तेजस एमके1ए भारत का हल्का लड़ाकू विमान है। भारतीय वायुसेना ने एचएएल से 180 ऐसे विमान मंगवाये है। इनमें से पहले बैच के लिये 2021 में जीई के साथ 99 इंजनों का अनुबंध हुआ था। जिसकी कीमत लगभग 5375 करोड़ रूपये है। एफ404-आईएन20 इंजन तेजस के लिये खासतौर पर तैयार किया गया है।
इसमें आफ्टरबर्नर के साथ लगभग 85 किलो न्यूटन थ्रस्ट मिलता है। पहले इंजन मार्च 2025 में पहुंचा था। लेकिन आपूर्ति धीमी रही। अगस्त 2026 तक कुल 10 इंजन पहुंच चुके थेे। सितम्बर में 4 और भेजने से आपूर्ति में सुधार साफ दिखाई दे रहा है। रक्षा सचिव ने भी हाल में बताया था कि अक्टूबर -दिसम्बर तक हर माह 4-4 इंजन आने की योजना है। इससे साल के अंत तक कुल इंजनों की संख्या 20 से ऊपर पहुंच सकती है।
साझेदारी और आगे की राह
जीई और HAL की यह साझेदारी भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग का हिस्सा है. बाद में अतिरिक्त 113 इंजनों का भी ऑर्डर दिया गया है. जीई ने उत्पादन बढ़ाने का वादा किया है. साल 2026-27 में 24 और उसके बाद 30 इंजन सालाना बनाने का लक्ष्य है. लेकिन चुनौतियां बाकी हैं।
इंजन लगने के बाद एकीकरण, परीक्षण और गुणवत्ता जांच में समय लगता है. पहले भी एक इंजन में तकनीकी समस्या आई थी, जिसे ठीक किया गया. भारत लंबे समय से अपना इंजन बनाने की कोशिश कर रहा है।  लेकिन फिलहाल विदेशी इंजन पर निर्भरता बनी हुई है. तेजस एमके2 और एएमसीए जैसे भविष्य के विमानों के लिए भी इंजन तकनीक महत्वपूर्ण होगी।
यह डिलीवरी सिर्फ चार इंजनों की नहीं है।  यह पूरे कार्यक्रम को पटरी पर लाने की दिशा में एक ठोस कदम है। अगर आपूर्ति का यह क्रम बना रहता है तो 2026 के अंत तक पहला स्क्वाड्रन तैयार होने की उम्मीद जगी है। स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने का सपना अब हकीकत के करीब पहुंच रहा है। HAL, वायु सेना और जीई तीनों को मिलकर काम करना होगा ताकि देरी कम हो और भारतीय आसमान में और ज्यादा तेजस उड़ सकें।

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