MP में लाखों कर्मचारियों के प्रमोशन की राह आसान, 1 नवंबर से पहले बदलेंगे भर्ती और सेवा नियम
भोपाल. मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस (1 नवंबर) से पूर्व राज्य सरकार कर्मचारियों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने की तैयारी कर रही है। इनमें अनुकंपा नियुक्ति, पदोन्नति, सेवा शर्तों और आचरण नियमों में संशोधन शामिल हैं। भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए भर्ती नियमों में भी संशोधन किया जा सकता है। सरकार भर्ती परीक्षा की संख्या को सीमित करने पर विचार कर रही है ताकि अभ्यर्थियों को अलग-अलग परीक्षाएं न देनी पडें। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सामान्य प्रशासन, वित्त और अन्य विभागों को नीतिगत मामलों पर शीघ्र कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए है।
संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया
प्रदेश में अनुकंपा नियुक्तियों के मामले लंबे समय से अटके हुए है। हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग ने 700 से अधिक नियुक्तियों के आदेश जारी किए है। संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर नीतिगत निर्णय की आवश्यकता है जबकि सेवा शर्तों से जुडे कई विषय भी लंबित है। कई विभागों ने 2023 की नीति को लागू नहीं किया है जबकि मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा की थी। 50 प्रतिशत पदों पर संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया भी चल रही है। ऊर्जा विभाग ने 6 हजार पदों पर विभागीय परीक्षा के माध्यम से संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन अन्य विभागों ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की।
चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की तृतीय श्रेणी के पदों पर पदोन्नति भी कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा सीपीसीटी के कारण प्रभावित हो रही है। कई विभागों में पदोन्नति के बाद कर्मचारियों को पदावनत भी किया गया है। इसके अलावा कर्मचारियों को दोबारा पदोन्नति देने के लिए पात्रता अवधि में छूट के नियमों में भी संशोधन की आवश्यकता है। जिन संवर्गों में 5 वर्ष सेवा देना आवश्यक है उनमें कुछ वर्षें की छूट देकर पदोन्नति पर विचार किया जा रहा है। भर्ती नियमों में प्रस्तावित परिवर्तन भी चर्चा में है। सरकार की मंशा है कि समान प्रकृति के पदों के लिए एक परीक्षा आयोजित की जाए। इससे बार-बार परीक्षा आयोजित करने में लगने वाले समय और संसाधनों की बचत होगी।
