NHAI और PWD की सैम्पल भी हुए फेल, सिकरौदा से मेहरा टोल, विक्की फैक्ट्री से एजी ऑफिस के मामले में हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

ग्वालियर. सड़कों की दुर्दशा और घटिया निर्माण को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ में जस्टिस जीएस अहलूवालिया एवं न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) और पीडब्ल्यूडी को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट द्वारा गठित कमीशन की जांच रिपोर्ट में नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहा की सड़क और एजी ऑफिस सेे विक्की फैक्ट्री पीडब्ल्यूडी सड़क पैच से लिये सैम्पल जांच में पूरी तरह फैल मिले। यह रिपोर्ट सोमवार को पेश की गयी है। इस मामले में अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
जांच कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहे के बीच बनाई गयी हाइवे सड़क के अधिकांश सैम्पल की गुणवत्ता जांच में फेल पाये गये। नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) की अंतरिम रिपोर्ट में भीस ड़क तय मानकों के अनुरूप नहीं पायी गयी। हर 6 माह में होने वाला एनएसवी सर्वे एनएचएआई ने किया ही नहीं और न ही इससे संबधित कोई दस्तावेज पेश कर सकी है।
पीडब्ल्यूडी की सड़क के सैम्पल फैल
एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री रोड़ पैच पीडब्ल्यूडी से लिये गये सैम्पल की रिपोर्ट भी बेहद खराब आयी है। यहां मानक के मुताबिक सड़क पर काम नहीं किया गया है। वैसे भी ग्वालियर में चेतकपुरी पर ही सबसे अधिक सड़क धंसकी है। हाईकोर्ट ने एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी दोनों विभागों के अधिवक्ताओं को रिपोर्ट सौंपते हुए जवाब दाखिल करने के निर्देश दिये है।
सिकरौदा चौराहे पर हाइवे किनारे शराब दुकान पर भी कोर्ट सख्त
5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई, ठेकेदार के भुगतान से पहले फैसला
कमीशन ने कोर्ट को अवगत कराया कि NHAI द्वारा ठेकेदार को एन्युटी भुगतान की अगली तारीख 6 अक्टूबर 2026 है। इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 तय की है, ताकि घटिया काम करने वाले ठेकेदारों को भुगतान पर रोक लगाई जा सके। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी तय समय में अपना जवाब दाखिल नहीं करते हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि उन्होंने कमीशन की रिपोर्ट स्वीकार कर ली है।
सुनवाई के दौरान कमीशन के सदस्य एडवोकेट गौरव समाधिया ने कोर्ट के संज्ञान में लाया कि सिकरौदा चौराहे पर नेशनल हाइवे के बिल्कुल किनारे “हर सेलिब्रेशन हमारा है” की टैगलाइन के साथ शराब की दुकान संचालित हो रही है, जबकि नियमानुसार यह हाइवे से कम से कम 500 मीटर दूर होनी चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से एक सप्ताह में जवाब मांगा है कि कम दूरी पर लाइसेंस कैसे जारी हुआ और इसे हटाने में कितना समय लगेगा।
हाईकोर्ट ने सड़कों के सैंपल एकत्र करने और तकनीकी बारीकियों व भ्रष्टाचार के पैटर्न को उजागर करने के लिए कमीशन के अधिवक्ताओं (गौरव समाधिया एवं हिमांशु शर्मा) के काम की जमकर तारीफ की। पीठ ने कहा कि कमीशन ने जमीनी स्तर पर सराहनीय कार्य किया है।
