विपक्ष में FCRA बिल को लेकर फूट, कांग्रेस ने बिल वापिसी की मांग की, टीएमसी-डीएमके की अलग राह

नई दिल्ली. FCRA संशोधन बिल को लेकर विपक्षी दलों के बीच एक राय नहीं बन पा रही है। जहां बिल को कांग्रेस पूरी तरह से वापिस लेने की मांग कर रही है। वहीं, दूसरी ओर टीएमसी, डीएमके और बीजेडी की ओर से इसे ज्वॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी यानी JPC  के पास भेजने की मांग सामने आई है। केन्द्र सरकार भी बिल को जेपीसी में भेजने के विकल्प पर विचार कर रही है।
FCRA  बिल को लेकर कांग्रेस का रूख फिलहाल सबसे सख्त है। पार्टी इसे वापिस लेने की मांग कर रही है। विपक्षी दलों के बीच चर्चा के बीच बिल को लेकर अलग-अलग राय सामने आयी है। वहीं, सरकार की तरफ से विपक्षी दलों से बातयीत कर जेपीसी के रास्ते पर सहमति बनाने की कोशिशें की जा रही है।
डीएमके, टीएमसी और बीजेडी की जेपीसी की मांग
टीएमसी ने राज्यसभा की बिजनेस एडवायजरी कमेटी में पहले बिल को जेपीसी के पास भेजने की बात कहीं थी। हालांकि बाद में पार्टी की ओर से इसे वापिस लेने की मांग भी सामने आयी है। डीएमके का कहना है कि बिल को या तो वापिस लिया जाये। फिर विस्तृत जांच के लिये जेपीसी के पास भेजा जाये। बीजेडी ने भी बिल को जेपीसी में भेजने की मांग की है। एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी केन्द्र से बिल वापिस लेने या जेपीसी के पास भेजने की मांग की हैं उनका कहना है कि विदेशी फंडिंग को हमेशा संदेह की नजर से नहीं देखा जा सकता है।
संसद की तस्वीर अभी साफ नहीं
एफसीआरए संशोधन बिल 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था । इसके बाद विभिन्न पक्षों की आपत्तियों के चलते इसे आगे बढ़ाने पर रोक लगी रही । बिल में विदेशी योगदान हासिल करने वाली संस्थाओं के एफसीआरए रजिस्ट्रेशन खत्म होने की स्थिति में उनसे जुड़े एसेट्स के प्रबंधन और निगरानी के लिए नई व्यवस्था का प्रस्ताव है.सोमवार की बीएसी बैठक में FCRA  बिल और प्रस्तावित परिसीमन बिल एजेंडे में शामिल नहीं थे । ऐसे में अब सरकार के सामने विपक्ष से सहमति बनाने और बिल को आगे बढ़ाने के लिए जेपीसी का विकल्प मौजूद है। हालांकि, विपक्षी दलों के बीच ही बिल को लेकर अलग-अलग रुख होने से आगे की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *