वेतन, पीएम से ग्रेच्युटी तक कंफ्यूजन अब दूर होगा, केन्द्र सरकार ने 45 दिन में जनता से मांगे सुझाव
नई दिल्ली. पिछले वर्ष 2025 में कई बदलावों से भरा रहा है। इसमें एक बड़ा बदलाव लेबर कोड में किया गया था। इसके तहत 28 कानूनों को खत्म करके सिर्फ 4 नये कानून को नोटिफाई किया गया है जो कि र्पिछले 21 नवम्बर 2025 से प्रभावी माना जायेगा। यह 4 लेबर कोड मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों संहिता 2020, है जोकि कर्मचारियों के लिये वेतन, पीएफ, पेंशन और सोशल सिक्योरिटी से हेल्थ तक के नियमों के साथ है। माना जा रहा है कि नये वर्ष में इन सभी कानूनों को पूरी तरह लागू कर दिया जायेगा।
खास बात यह है कि इसकी गणना एक सामान्य कामकाजी वर्ग के परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखकर होगी। इनमें भोजन, कपड़े, घर का किराया, ईधन, शिक्षा, बिजली, मेडीकल खर्च और अन्य बुनियादी जरूरतें शामिल है। कुल मिलाकर केन्द्र सरकार द्वारा एक राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय की जायेगी। कोई भी राज्य इसके नीचे का आंकड़ा तय नहीं कर सकेगी। ़
समय पर वेतन, कटौती की लिमिट सेट
नये कानूनों के तहत कर्मचारियों को समय पर वेतन दिया जायेगा। कटौतियों पर सख्त लिमिट सेट की गयी यहै। किसी भी वेतन अवधि में कुल कटौतियां कर्मचारी के वेतन के 50प्रतिशत या इससे कम हो सकती है। इससे ज्यादा नहीं, यानी सैलरी मेें सिर्फ बेसिक-पे, डीए और अन्य भत्ता शामिल होगा। यह सभी घटक कुल सैलरी या सीटीसी का अधिकतम 50 प्रतिशत होगा। बाकी 50प्रतिशत हिस्से में एचआरए बोनस, कमीशन, पीएफ, ओवरटाइम और अन्य शामिल होंगे। अगर यह अलाउंस मय सीमा से अधिक हो जाते हैं तो एकस्ट्रा अमाउंट स्वयं सैलरी में जुड़ जायेगा।
काम के घंटे और रात की शिफ्ट
ड्राफ्ट रूल्स में सप्ताह में अधिकतम 48 काम के घंटे तय किये गये हैं। जबकि वेतन की गणना 8 घंटे के कार्य दिवस के आधार पर होगी। इसके अलावा रात की शिफ्टों के लिये वेतन की गणना भी खास तरीके से होगी। यह प्रावधान मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, लॉजिस्टिक्स और आईटी सेक्टस के लिये महत्वपूर्ण है। जहां 24 घंटे काम होता है। महिला कर्मचारियों को सहमति और अनिवार्य सुरक्षा के साथ नाईट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गयी है।
खास बात ये है कि इसकी गणना एक सामान्य कामकाजी वर्ग के परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखकर होगी. इनमें भोजन, कपड़े, घर का किराया, ईंधन, बिजली, शिक्षा, मेडिकल खर्च और अन्य बुनियादी जरूरतें शामिल हैं. कुल मिलाकर केंद्र सरकार (Central Govt) द्वारा एक राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय की जाएगी, कोई भी राज्य इसके नीचे का आंकड़ा तय नहीं कर सकेगी.
काम के घंटे और रात की शिफ्ट
ड्राफ्ट रूल्स में सप्ताह में अधिकतम 48 काम के घंटे तय किए गए हैं, जबकि वेतन की गणना 8 घंटे के कार्य दिवस के आधार पर होगी. इसके अलावा रात की शिफ्टों (Night Shifts) के लिए वेतन की गणना भी खास तरीके से होगी. ये प्रावधान मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, लॉजिस्टिक्स और आईटी सेक्टर्स के लिए महत्वपूर्ण हैं, जहां 24 घंटे काम होता है. महिला कर्मचारियों को सहमति और अनिवार्य सुरक्षा के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है।
समय पर सैलरी और कटौती की लिमिट सेट
नए कानूनों के तहत कर्मचारियों को समय पर सैलरी दी जाएगी. कटौतियों पर सख्त लिमिट सेट की गई हैं. किसी भी वेतन अवधि में कुल कटौतियां कर्मचारी के वेतन के 50% या इससे कम हो सकती हैं, इससे अधिक नहीं. यानी सैलरी में सिर्फ बेसिक-पे, डीए (DA) और अन्य भत्ता शामिल होगा और ये सभी घटक कुल सैलरी या CTC का अधिकतम 50% होगा. बाकी 50% हिस्से में HRA, बोनस, कमीशन, PF, ओवरटाइम और अन्य शामिल होंगे. अगर ये अलाउंस तय सीमा से ज्यादा हो जाते हैं तो एक्स्ट्रा अमाउंट खुद ही सैलरी में जुड़ जाएगा।
