सीताराम साहनी को बाराघाटा औद्योगिक क्षेत्र में आवंटित प्लॉट की लीज हाईकोर्ट ने किया रद्द
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच की युगल पीठ ने एक औद्यौगिक भूखंड का आवंटन और लीट निरस्तीकरण को वैध ठहराते हुए इसे उद्यमिता की मूल भावना के अनुरूप बताया है। न्यायालय ने कहा है कि वर्षो तक उद्योग स्थापित न करना गंभीर लापरवाही है। जोकि न केवल औद्योगिक विकास को बाधित करता है। बल्कि सक्रिय और इच्छुक उद्यमियों के मौका भी छीनता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्य शासन द्वारा की गयी यह कार्यवाही न तो मनमानी है। न हीं नियमों के विरूद्ध, लम्बे वक्त तक भूखंड को निष्क्रिय रखना, औद्योगिक नीति और विकास के उद्देश्यों के विरूद्ध है।
26 वर्ष पूर्व हुआ था आवंटन
यह मामला ग्वालियर के बाराघाटा औद्योगिक क्षेत्र स्थित लगभग 15 हजार वर्गफीट भूमि से जुड़ा हुआ। उक्त प्लॉट वर्ष 1981 में सीताराम साहनी को फोटो फ्रेम और संबंधित उद्योग स्थापित करने के लिये 99 वर्षो की लीज पर आवंटित किया था। लीज की शर्तो के मुताबिक तय समय-सीमा में निर्माण कर उत्पादन प्रारंभ करना अनिवार्य था। रिर्का के मुताबिक भूखंड पर न तो कोई निर्माण किया गया और न ही कोई औद्योगिक गतिविधि प्रारंभ की गयी। शर्तो के उल्लघंन पर वर्ष 1990 में लीज निरस्त कर दी गयी थी। इसके खिलाफ दायर याचिका पर वर्ष 1995 में हाईकोर्ट ने आवंटी को एक और मौका देते हुए निरस्तीकरण आदेश रद्द किया। लेकिन इसके बाद भी भूखंड प्लाट पर कोई गतिविधि प्रारंभ नहीं की गयी थी।
2008 में दूसरे को आवंटन
वर्ष 1996 में मूल आवंटी सीताराम साहनी का निधन हो गया। उनके उत्तराधिकारियों ने भी उद्योग स्थापित करने की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किया। राज्य शासन ने अदालत को बताया कि करीब 26–27 वर्षों तक भूखंड निष्क्रिय रहा, जिससे औद्योगिक विकास प्रभावित हुआ। निरीक्षण के बाद वर्ष 2008 में शासन ने भूखंड का कब्जा लेकर इसे मेसर्स ग्वालियर स्टोन वर्क्स को पुनः आवंटित कर दिया, जहां वर्तमान में औद्योगिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। अपीलकर्ता चंद्रकुमार साहनी की ओर से दलील दी गई कि लीज विधिवत निरस्त नहीं की गई और नोटिस प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जैसे ही आवंटन निरस्त होता है, लीज स्वतः ही प्रभावहीन हो जाती है। अदालत ने अपील खारिज करते हुए राज्य शासन की कार्रवाई को सही ठहराया।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगल पीठ ने ग्वालियर में एक औद्योगिक भूखंड का आवंटन और लीज निरस्तीकरण वैध ठहराया है। यह कार्रवाई भूखंड पर 26 साल तक उद्योग स्थापित न करने के कारण की गई। कोर्ट ने इसे उद्यमिता की मूल भावना के विपरीत और गंभीर लापरवाही बताया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्षों तक उद्योग स्थापित न करना न केवल औद्योगिक विकास को बाधित करता है, बल्कि सक्रिय और इच्छुक उद्यमियों को भी अवसर से वंचित करता है। राज्य शासन की यह कार्रवाई न तो मनमानी है और न ही नियमों के विरुद्ध।
