सविदा कर्मियों का दावा मनमाने तरीके से खारिज नहीं कर सकते -हाईकोर्ट
ग्वालियर. कर्मचारी को नियमित होने का स्वतः अधिकार भले ही न हो, लेकिन संस्थान उसका दावा मनमाने तरीके से खारिज नहीं कर सकता है। पहले के मूल्यांकन में काम संतोषजनक बताया गया है तो बाद में प्रदर्शन औसत या खराब मानने की वजह भी स्पष्ट करना होगा। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए भारतीय पर्यटना एवं यात्रा प्रबंध सस्थान का 2 सितम्बर 2013 का आदेश रद्द किया है। मामला प्रशासनिक अधिकारी प्रियंका चौहान के नियमितीकरण के दावे से जुड़ा है। जस्टिस आनंदसिंह बहरावत ने कहा है कि संस्थान को तर्कसंगल आधार बताना होगा।
प्रियंका की संविदा समय-समय पर बढ़ाई गयी थी और बाद में समिति ने शुरूआती 3 अवधियों का प्रदर्शन औसत और चौथी बार का खराब माना है। इसी आधार पर नियमितीकरण से मना कर दिया गया था। संस्थान ने 20 जनवरी 2012 की नोटशीट को आधार बनाया है।जिसकी प्रामाणिकता पर प्रियंका ने सवाल उठाये थे।
मूल्यांकन और पुराने नोटशीट की पुनः जांच
हाईकोर्ट ने नीटशीट को फर्जी घोषित नहीं किया है। बल्कि उसकी प्रामणिकता, पुराने मूल्यांकन और संविदा बढ़ाने के आदेशों की जांच करने के लिये कहा है। प्रतिकूल मूल्यांकन की जानकारी देकर प्रियंका को पक्ष रखने का मौका भी देना होगा। प्रमाणित प्रति मिलने के बाद, जहां तक व्यावहारिक हो, 3 माह में वजह समेत नया निर्णय देना होगा। हाईकोर्ट ने सीधे नियमित करने का आदेश नहीं दिया है।
