350 वर्ष पुरानी प्रतिमा ग्वालियर में है विराजमान, राजस्थान के लड्डुओं का लगता है भोग

ग्वालियर. देशभर में बुधवार से गणेशोत्सव की शुरूआत के साथ ही ग्वालियर के प्रसिद्ध अर्जी वाले गणेश में भक्तों की भीड़ दिनों दिन बढ़ रही है। करीब 350 साल पुरानी यह प्रतिमा एमएलबी रोड पर फूलबाग गुरूद्वारे के सामन सड़क किनारे विराजमान है। ऐसा कहा जाता है कि पहले यहां लोग वर्षो तक एक बड़े पत्थर की पूजा करते थे। लेकिन सर्न 1़980 में एक चमत्कार हुआ। पत्थर ने अपना चोला छोड़ दिया। उस चोले का वजन लगभग एक क्विटल निकला। तभी से गणेश जी की यह प्रतिमा अपने वर्तमान स्वरूप में सोमने आयी है। प्रतिमा के दोनों ओर रिद्धी और सिद्धि भी विराजमान है।
27 अगस्त शुक्रवार को गणेश चर्तुथी से शुरू होने वाले 11 दिन के गणेशोत्सव में भी यहां विशेष आयोजन होंगे। इस मौके पर गली-गली, घर-घर में गणपति बप्पा मोरया की गूंज सुसनाई देगी।
11 दिन होंगे विशेष कार्यक्रम
इस मंदिर को अर्जी वाले गणेश, कांच वाले गणेश और कुंवारों के गणेश के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर की प्रसिद्धि इतनी है कि यहां रोजाना भक्तों की भीड़ लगी रहती है, और बुधवार के दिन तो यहां कदम रखने तक की जगह नहीं मिलती। सड़क पर घंटों जाम लगना आम बात है।
राजस्थान के लड्डू से ही लगता है भोग
माना जाता है कि यदि कोई भक्त यहां आकर 11 या 7 बुधवार तक श्रद्धापूर्वक अर्जी लगाता है, तो उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। यहां गणेशजी को सिर्फ राजस्थान से मंगाए गए मोटी बूंदी के लड्डू का ही भोग लगाया जाता है।
