स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम क्यों खास, कई लेयर से निगरानी और लेजर गाइडेड हमले की रखता है क्षमता

नई दिल्ली. ओडिशा के तट पर रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली (आईएडीडब्ल्यूएस) का पहल उड़ान परीक्षण कामयाब रहा। इस स्वदेशी प्रणाली ने 3 अलग-अलग लक्ष्यों को विभिन्न ऊंचाईयों और दूरी पर एक साथ नष्ट करके अपनी ताकत दिखाई है। यह प्रणाली भारत के महत्वपूर्ण ठिकानों को हवाई हमलों से बचाने के लिये तैयार की गयी है। इसे पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर घोषित सुदर्शन चक्र रक्षा कवच का हिस्सा माना है।
क्या है आईएडीडब्ल्यूएस
आईएडीडब्ल्यूएस यानी कि एंटीग्रेटिंड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम है जो पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकों से बनी है। यह प्रणाली 3 मुख्य हथियारों को एकीकृत करती है।
क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल
यह छोटी दूरी की मिसाइल प्रणाली है। तेजी से प्रतिक्रिया देती है। इसका मुख्य काम सेना की टुकडियों को दुश्मन के हवाई हमलों से बचाना है। वह 3 से 30 किमी की दूरी तक लक्ष्य को नष्ट कर सकती है। यह प्रणाली पूरी तरह से मोबाइल है। चलते-फिरते भी हमला कर सकती है। इसमें 2 रडार-एक्टिवऐरे बैटरी सर्विलांस रडार और एक्टिव ऐरे बैटरी मल्टी फंक्शन रडार शामिल है। जो 360 डिग्री निगरानी और ट्रैकिंग कर सकते है।
