टीआई बोले -सीसीटीवी जून से हैं खराब, कम्पनी 72 घंटें में कैमरे ठीक करने के लिये बाध्य, टीआई-डीजीपी के विरोधीभाषी जवाब हाईकोर्ट में
ग्वालियर. मध्यप्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना ने प्रदेश के पुलिस थानों और आउटपोस्ट पर लगे सीसीटीवी कैमरों के संबंध में जनवरी 2025 में हाईकोर्ट में शपथ पत्र दिया था। इसमें दावा किया था कि निजी कंपनी, जिसे कैमरे इंस्टालेशन का काम दिया है। वह कंपनी कैम्रा खराब होने की स्थिति में 72 घंटे में ठीक करने के लिये बाध्य रहती है। वहीं, पुलिस थाना मुरार के टीआई मदनमोहन मालवीय ने बुधवार को हाईकोर्ट में पुलिस भवन के फ्रंट में लगा सीसीटीवी कैमरा (जिसमें फ्रंट व्यू कवर) होता हे। 15 जून 2024 से खराब होना बताया। करीब 9 महीने से कैमरा खराब होने के मामले को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रहे जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की डिवीजन बैंच ग्वालियर एसएसपी को यह बताने के लिये कहा है कि कैमरा खराब होने के बाद उसे ठीक कराने के लिये फॉलोअप कैसे करते हैं, यदि कम्पनी कैमरा ठीक नहीं करती है तो फिर क्या करते हैं।
यह है मामला
2 महिलाओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मुरार पुलिस पर परिजनों को बन्दी बनाने का आरोप लगाया था। हाईकोर्ट के आदेश पर मुरार पुलिस ने बंधवार को सीसीटीवी फुटेज पेश किये। इसमें 2 मार्च की अलसुबह 4-5 मार्च का महिलाओं के परिजन बाइक से थाने में आते हुए और बाद में जाते दिखाई दे रहे है। हाईकोर्ट को तीनों दिन के फुटेज दिये। अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपेन्द्रसिंह कुशवाह ने हाईकोर्ट को बताया कि पुलिस ने याचिकाकर्त्ताओं के परिजनों को कभी बंदी बनाया ही नहीं। जिसकी पुष्टि फुटेज से हो रही है। यहां पर आपको बता दें कि प्रदेश के सीसीटीवी इंस्टालेशन व मेंटेनेंस का कार्य टेली कम्युनिकेशन कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड को दिया गया है।
