क्या है ऑपरेशन 1027 जिसने बिगाड़ दिये म्यांमार के हालात

नई दिल्ली. भारत के पड़ोसी मुल्क म्यांमार में एक बार फिर हालात बिगड़ रहे है। वहां पिछलीे 3 हफ्ते से सेना और जुंटा विरोधी बलों के बीच लड़ाई चल रही है। जुंटउा माने सैन्य शासन, तानाशाही या निरंकुशता, म्यांमार की मौजूदा सरकार को जुंटा शासन ही कहते हैं। वहां 2021 में सैन्य तख्तापलट हो गया था और सेना ने वहां की नेता आंग सान सू की तो गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। अब वहां फिर से लोकतंत्र समर्थक फोर्सेस और सेना के बीच युद्ध छिड़ गया था। लोकतंत्र समर्थक फोर्सेस ने इसे ऑपरेशन 2017’’ नाम दिया है। ऑपरेशन 1027, दरअसल में वह तारीख है। जिस दिन इसे शुरू किया गया था। फार्सेस ने सेना के खिलाफ 27 अक्टूबर को ऑपरेशन लांच किया था।
क्या है ऑपरेशन 2027
इस साल 27 अक्टूबर को म्यांमार के 3 विद्रोही गुट साथ आये। यह थे अराकन आर्मी (AA), म्यांमारी नेशनल डिफेंस अलायंस आर्मी (MNDAA), और ताआंग नेशनल लिबरेशन आर्मी(TNLA)। चूंकि वहां के सैन्य शासन के खिलाफ इन 3 गुटों ने 27 अक्टूबर को विद्रोह छेड़ा था। इसलिये इसे ऑपरेशन 1027 नाम दिया गया है।

कितने ताकतवर हैं तीनों?
MNDAA: म्यांमार नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस आर्मी इन तीनों में सबसे ताकतवर मानी जाती है. ऑपरेशन 1027 को यही लीड कर रही है. इसका गठन 1989 में हुआ था. इसमें लगभग 6 हजार लड़ाके है।
AA: अराकन आर्मी का गठन 2009 में हुआ था. ये रखाइन प्रांत में एक्टिव है और यूनाइटेड लीग ऑफ अराकन (ULA) की मिलिट्री विंग है. इसके नेता त्वान म्राट नाइंग है। माना जाता है कि इसके पास 35 हजार से ज्यादा लड़ाके हैं, जो काचिन, रखाइन और शान प्रांत में एक्टिव हैं.
TNLA: ताआंग नेशनल लिबरेशन आर्मी पलाउंग स्टेट लिबरेशन फ्रंट (PSLF) की मिलिट्री विंग है।  2005 में सरकार के साथ समझौते के बाद TNLA का विघटन हो गया था. 2011 में इसे फिर से गठित किया गया. माना जाता है कि इसमें आठ हजार के आसपास लड़ाके है।
पर विद्रोह किस बात का?
इस पूरे ऑपरेशन का मकसद वहां के सैन्य शासन का मुकाबला करना है।  ‘ब्रदरहुड अलायंस’ के नाम से बना ये विद्रोही गठबंधन उत्तरी शान प्रांत में सेना और उसके सहयोगी सैन्य संगठनों को खदेड़ना है।  ये प्रांत म्यांमार-चीन सीमा के पास पड़ता है। 27 अक्टूबर को अलायंस ने बयान जारी कर कहा था कि उनके ऑपरेशन का मकसद नागरिकों की रक्षा करना, आत्मरक्षा करना, अपने इलाकों पर नियंत्रण हासिल करना और म्यांमार सेना के हमलों और हवाई हमलों का जवाब देना है।

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