बंगाली समाज द्वारा मां दुर्गा की बिदाई के वक्त करते हैं सिंदूर खेला और मांगती हैं पति के लम्बी उम्र की दुआ

ग्वालियर. बंगाली सोशल एवं कल्चर एसोसियेशन के द्वारा मानस भवन में पिछले 31 वर्षो मां काली की स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना की जा रही है। 6वीं से लेकर 10वीं तक दुर्गा पूजन का उत्सव मनाया जाता है। बंगाली समाज का ऐसा मानना है मां दुर्गा अपने मायके लक्ष्मी, सरस्वती, गणेंश और कार्तिक के साथ सपरिवार आती है घर के सभी लोग मां मां दुर्गा के स्वागत में नाचते और गाते है।

सिन्दूर खेला का विशेष महत्व
10वीं के दिन सभी समाज के लोग मां दुर्गा के सम्मान में देवी बुरोन उत्सव में सिन्दूर लगाकर और मिठाई खिलाकर खेला कर मां को ससुराल के लिये भेजते हैं। दुर्गा पूजा के अंतिम दिन बंगाली समाज में सिन्दूर खेला का महत्व है। इस दिन पश्चिम बंगाल सहित देशभर में महिलायें मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती है। इसके बाद एक दूसरे को सिन्दूर लगाकर सदा सुहागिन रहने की कामना करती है। ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा नवरात्र में पृथ्वी पर अपने मायके आती है और 10वें दिन ससुराल के विदा हो जाती है इसे यादगार बनाने के लिये ही सिन्दूर खेला की परंपरा है।

इन्होंने किया आयोजन
बंगाली सोशल एवं कल्चर एसोसियेशन बंगाली सोशल एन्ड कल्चरल एसोसिएशन के अध्यक्ष तपन दास ,सचिव मृणाल रॉय मीडिया प्रभारी रूपेन्द्र सरकार, पूजा कमेटी के अध्यक्ष के डी बिस्वास, सचिव सोईकेत कुण्डू, प्रवीर मित्रा, संजय मजूमदार, जॉय बनर्जी, गायत्री सरकार, नीतू दत्ता, संजय मुखर्जी, विभास डे, डॉ रंजीत बिस्वास, ब्रजदीप सरकार आदि निवेदिता बनर्जी, रैना मुखर्जी, अर्चना मुखर्जी, लीना जाना, जय बख्शी और सुमित हाजरा डॉ अविक मज़ुमदार, डॉ एएम जाना, अशोक घोष आदि लोग मिलकर प्रतिवर्ष आयोजन करते हैं।
