नवंबर से बदले कई नियम, गैस सिलेंडर महंगा और FASTag का लोकल पास लागू
नई दिल्ली. कॉमर्शियल सिलेंडर आज से 17 रुपए तक महंगा हो गया है। आज से आपके मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आने पर नंबर के साथ कॉलर का असली नाम भी दिखेगा। टोल प्लाजा के 20 किमी के दायरे में रहने वाले वाहन मालिकों को 1 साल का लोकल फास्टैग पास मिलेगा। नवंबर 2026 में सिलेंडर, टेलिकॉम, ट्रांसपोर्ट और इन्वेस्टमेंट से जुडे ऐसे ही 5 बदलाव हो रहे है।

कॉमर्शियल सिलेंडर 17 रुपए महंगा हुआ
तेल कंपनियों ने दिवाली से पहले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 17 रुपए तक महंगा कर दिया गया है। कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च मामूली बढेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ता महंगा कर सकते है। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है।
अब फोन पर कॉलर का असली नाम दिखेगा
आज से आपके फोन पर जब भी किसी अनजान नंबर से कॉल आएगा तो स्क्रीन पर नंबर के साथ उस व्यक्ति का असली नाम भी दिखेगा। यह नाम वहीं होगा जो उसने सिम खरीदते समय सरकारी आईडी जैसे आधर में दिया था। इसके लिए आपको कोई थर्ड पार्टी एप डाउनलोड या सर्विस शुरू करने जरूरत नहीं होगी, यह अपने-आप काम करेगी। दूरसंचार विभाग ने सभी टेलीकॉम कंपनियों के लिए इस नियम को लागू करना अनिवार्य कर दिया है। अभी अनजान नंबरों की पहचान के लिए ट्रूकॉलर जैसे एप का इस्तेमाल करना पडता है लेकिन अब बिना किसी थर्ड पार्टी एप के ही आपको पता चल जाएगा कि कॉन कॉल कर रहा है। इससे फर्जी और फ्रॉड कॉल से बचने में आसानी होगी।
टोल के 20 किमी दायरे में रहने वालों के लिए फास्टैग का लोकल पास
टोल प्लाजा के 20 किमी के दायरे में रहने वाले निजी वाहन मालिकों को हर बार टोल टैक्स देने की राहत मिलेगी। सरकार ने 1500 या 3000 की तय फीस में पूरे 1 साल का लोकल फास्टैग पास देने का नया नियम आज से लागू कर दिया है। टोल प्लाजा के आसपास रहने वालों का हर महीने टोल पर होने वाला बडा खर्च बचेगा। अब उन्हें बार-बार टोल कटवाने की टेंशन नहीं होगी और पूरे साल सिर्फ एक बार पास की तय फीस देकर आसानी से सफर कर सकेंगे।
म्यूचुअल फंड एप पर डायरेक्ट प्लान डिफॉल्ट होगा
1 नवंबर से म्यूचुअल फंड कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निवेश करते समय डायरेक्ट प्लान अपने-आप चुना हुआ यानी डिफॉल्ट मिलेगा। अगर कोई निवेशक रेगुलर प्लान चुनता है तो उसे पहले ही स्क्रीन पर चेतावनी मिलेगी कि रेगुलर प्लान में कितना एक्स्ट्रा खर्च 0.66 से 1.7 तक लगेगा।
छोटेा ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए दूसरे राज्यों में सामान बेचना आसान
1 नवंबर से छोटे ई-कॉमर्स विक्रेता दूसरे राज्यों में अलग से ऑफिस खोले बिना भी देशभर में सामान बेच सकेंगे। सीबीआईसी ने जीएसटी नियमों में ढील दी है जिसके तहत विक्रेता जिस ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट पर बेचते हे उसके गोदाम के पते को ही दूसरे राज्रूों में अपना जीएसटी रजिस्ट्रेशन एड्रेस बता सकेंगे।
