भूकम्प के बाद तिब्बत में फटी जमीन, 305 मीटर खिसकी

नई दिल्ली. गुरूवार 22 अक्टूबर को तिब्बत में 7.0 तीव्रता का भूकम्प आया था। लेकिन अब जमीन पर इसके प्रभाव देखने को मिला है। वैज्ञानिकों ने भूकंप के केन्द्र से लगभग 15 किमी दूर जमीन में टूटने और खिसकने के संकेत देखे है। जांच में कुछ जगहों पर जमीन के स्तर में 3.5 मीटर का अंतर मिला है। वहीं, कुछ हिस्सों में जमीन 0.9 मीटर तक बाई और खिसकी, जमीन की दरारों के साथ रेत में पानी भरने के संकेत भी मिले है। इन निशानों से वैज्ञानिकों को समझने में मदद मिल सकती है। भूकम्प के दौरान धरती के अन्दर क्या हुआ था।
यूएसजीएस के अनुसार, इस भूकंप का केन्द्र चीन के तिब्बत वाले इलाके में नागचू शहर से लगभग 191 किमी पूर्व-उत्तर पूर्व में था। भूकंप जमीन से लगभग 18 किमी नीचे आया था। वैज्ञानिकों के अनुसार, जमीन की ऊपरी परत में खिंचाव के कारण चट्टानों में हलचल हुई है। इसका प्रभाव जमीन की सतह पर भी दिखाई दिया है।
भूकंप के बाद वैज्ञानिकोकं ने जमीन पर टूटने और खिसकने के निशान दिखाई दिये है। जमीन के भीतर चट्टानों के जिस हिस्से में टूटने या खिसकने में दरार बनती है। उसे फॉल्ट कहते हैं जब टूट-फूट का असर जमीन की सतह पर भी दिखाई देता है। तो इसे सरफेस रप्चर कहा जाता है।
